बरेली की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत में एक व्यवसायी ने शहर के कुछ रसूखदार लोगों के खिलाफ गंभीर आरोपों के साथ न्याय की गुहार लगाई है। भोजीपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम बुझिया शुमाली निवासी जय कुमार गंगवार ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि उनके विरोधियों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाया और उनके जरूरी दस्तावेज व चेक हड़प लिए। रंगदारी और गोदाम का ताला तोड़ने से शुरू हुआ विवाद
पीड़ित जय कुमार गंगवार के मुताबिक, पूरा मामला व्यापारिक रंजिश और पुरानी शिकायतों से जुड़ा है। उन्होंने सिद्धार्थकुंज निवासी आदर्श कुमार अग्रवाल और उर्मिला काटेज कालोनी निवासी शिव कुमार अग्रवाल के खिलाफ 11 नवंबर 2025 को एसएसपी बरेली के समक्ष रंगदारी मांगने और गोदाम का ताला तोड़कर माल निकालने के संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि इसी शिकायत का बदला लेने के लिए इन लोगों ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर एक आपराधिक षड्यंत्र रचा और 15 नवंबर को एक फर्जी घटना दिखाकर जय कुमार के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज करा दिया। फर्जी मेडिकल और कूट रचित दस्तावेजों का खेल
कोर्ट में दी गई अर्जी के अनुसार, आदर्श कुमार अग्रवाल, शिव कुमार अग्रवाल, मोहित अग्रवाल और अंकित अग्रवाल ने जिला अस्पताल से फर्जी और कूटरचित मेडिकल रिपोर्ट तैयार करवाई ताकि जय कुमार को फंसाया जा सके। पीड़ित का दावा है कि जब वह 19 नवंबर को कचहरी में कानूनी राय लेने आए थे, तभी उन्हें रोक लिया गया। आरोप है कि इस दौरान उनकी जेब से तीन हस्ताक्षर युक्त बैंक चेक निकाल लिए गए और उन्हें अपने पास रख लिया गया। बेटे के फर्जी हस्ताक्षर और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल
उन्होंने यह भी आरोप लगाया गया है कि गिरफ्तारी की कागजी कार्रवाई के दौरान जय कुमार के पुत्र दीपांशु के फर्जी और कूटरचित हस्ताक्षर बनाए गए। रिकॉर्ड में जिस मोबाइल नंबर पर सूचना देना दर्ज है, वह असल में जय कुमार का ही नंबर था। पीड़ित का कहना है कि उनके स्वयं के मोबाइल नंबर को ही पुत्र का नंबर बताकर कागजों में हेराफेरी की गई। इस पूरे मामले में आदर्श कुमार अग्रवाल, शिव कुमार अग्रवाल, मोहित अग्रवाल और अंकित अग्रवाल की मुख्य भूमिका बताई गई है। रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश की अपील
जय कुमार के वकील लवलेश पाठक ने बताया कि जेल से रिहा होने के बाद जय कुमार ने सभी उच्चाधिकारियों से शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने पर अब उन्होंने न्यायालय की शरण ली है। उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना के आदेश दिए जाएं।

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