DniNews.Live

बदायूं HPCL हत्याकांड..साजिशन ड्राइवर ने ही दी बोलेरो की चाबी:लूट की धारा हटी, दो के खिलाफ साजिश की FIR, अरेस्ट, दो CO की टालमटोल में हुआ मर्डर

बदायूं के HPCL प्लांट में हुए डबल मर्डर केस में बड़ा खुलासा हुआ है। अब तक जिसे पुलिस लूट के इरादे से हत्या मान रही थी, वह दरअसल साजिशन हत्या निकली। दरअसल आरोपी अजय प्रताप ने हत्या करने के बाद जिस बोलेरो कार थाने पहुंचकर सरेंडर किया था, वह उसने लूटी नहीं थी, बल्कि डीजीएम सुधीर गुप्ता के ड्राइवर ने खुद ही साजिशन आरोपी अजय प्रताप को बोलेरो को चाबी सौंपी थी। अब पुलिस ने इस मुकदमे से लूट की धारा हटाते हुए साजिश की धाराएं जोड़ी हैं। डीजीएम सुधीर गुप्ता के ड्राइवर समेत दो अन्य आरोपियों को नामजद किया है। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल हुई बोलेरो को केस प्रॉपर्टी बनाकर सुरक्षित कर लिया है, जो अब मुकदमे के फैसले तक थाने में ही रहेगी। वहीं जांच के दौरान पुलिस की बड़ी लापरवाही भी सामने आई है। दरअसल पूर्व में मिली शिकायतों पर डीएम ने सीओ स्तर के अधिकारी को जांच के आदेश दिए थे, पर दो सीओ के बीच क्षेत्राधिकार को लेकर टालमटोल चलता रहा और समय पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद यह हत्याकांड हो गया। घटना के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए सीओ दातागंज का भी तबादला बिल्सी कर दिया है, जबकि सीओ उझानी को पहले ही लखनऊ मुख्यालय अटैच किया जा चुका है। अब पूरा मामला सिलसिलेवार ढंग से समझिए… बदायूं HPCL प्लांट में हुए दोहरे हत्याकांड को अब तक पुलिस लूट मान रही थी। पर जांच के दौरान साजिशन हत्या की बात सामने आ रही है। जांच में सामने आया कि ड्राइवर ने अपनी मर्जी से आरोपी अजय प्रताप को गाड़ी की चाबी दी थी। मुख्य आरोपी अजय प्रताप वारदात को अंजाम देने के बाद उसी बोलेरो से थाने पहुंचा और सरेंडर कर दिया था। इसी गाड़ी का इस्तेमाल उसने प्लांट में घुसने और वारदात के बाद भागने में किया था। इसी आधार पर हत्या के साथ-साथ लूट की धारा दर्ज की गई थी। पर जांच में यह तत्थ्य सामने आने के बाद पुलिस ने लूट की धारा को हटाते हुए साजिश की धारा जोड़ी है और ड्राइवर समेत दो नए आरोपियों को नामजद किया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ कर रही है। वारदात में इस्तेमाल की गई बोलेरो को पुलिस ने अहम साक्ष्य मानते हुए जब्त कर लिया है। यह गाड़ी अब मुकदमे के अंतिम फैसले तक थाने में ही माल मुकदमाती के रूप में सुरक्षित रखी जाएगी। अधिकारियों की टालमटोल भी बनी वजह
मामले में यह भी सामने आया है कि प्लांट के डीजीएम सुधीर गुप्ता ने पहले ही डीएम और एसएसपी से शिकायत कर आरोपी अजय प्रताप से जान का खतरा बताया था। सुधीर गुप्ता की शिकायत पर डीएम ने सीओ स्तर से मामले की जांच के आदेश दिए थे। डीएम के निर्देश के बावजूद क्षेत्राधिकार को लेकर दातागंज और उझानी सर्किल के सीओ एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे। बताया जा रहा है कि आरोपी के क्षेत्रीय विधायक से करीबी संबंध थे, जिसके चलते सीओ स्तर के अधिकारी कार्रवाई से बचने का प्रयास करते रहे। अंततः डबल मर्डर हो गया। घटना के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए सीओ दातागंज का तबादला बिल्सी कर दिया, जबकि सीओ उझानी को पहले ही लखनऊ मुख्यालय अटैच किया जा चुका है। 12 मार्च को HPCL प्लांट भरी मीटिंग में घुसकर किया था डबल मर्डर… 13 मार्च को मुठभेड़ में अरेस्ट रामू उर्फ अजय प्रताप सिंह (45) ने पुलिस को बताया था- 12 मार्च को दोपहर 1 बजे मैं HPCL प्लांट गया था। उस वक्त प्रशासनिक भवन में मीटिंग चल रही थी। मैं वहां पहुंचा, तो 5 लोग बैठे थे। मैंने सभी को बातों में उलझाए रखा कि मुझे नौकरी पर वापस रख लो। इसी बीच मैं असिस्टेंट मैनेजर हर्षित मिश्रा के पीछे पहुंचा और पीठ पर तमंचा सटाकर ट्रिगर दबा दिया। आगे पड़ी मेज पर खून का फव्वारा छूटा, जिसे देखकर लोग डर गए और भागने लगे। इसके बाद मैंने DGM सुधीर गुप्ता को दौड़ा लिया। 3 राउंड फायरिंग की, जिनमें से 2 गोलियां सुधीर को लगीं। वह जमीन पर गिर पड़े। पुलिस ने गेट के भीतर लगे CCTV चेक किए तो पता चला कि 1:55 बजे बोलेरो लेकर अजय प्लांट के अंदर गया था। 1:59 बजे बाहर निकला। यानी उसने सिर्फ 4 मिनट में वारदात को अंजाम दिया। अजय ने बताया- जब प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहित की जा रही थी, तब अजय प्रताप सिंह ने जमीन खरीदवाने में अफसरों की मदद की थी। इसके बदले उसे प्लांट में आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में प्लांट में नौकरी मिली थी। वह पराली का ठेका भी लेता था। अजय प्रताप सिंह की प्लांट के अफसरों से अच्छी जान पहचान थी। इसलिए वह लोगों की नौकरी आसानी से प्लांट के अंदर आउटसोर्स के जरिए लगवा देता था। इसके बदले वो रुपए लेता था। पराली के ठेके भी उठाता था। रुपए लेकर नौकरी दिलाने की बात जब डीजीएम को पता चली तो उन्होंने तीन महीने पहले इसे नौकरी से निकाल दिया। पराली के ठेके देने बंद कर दिए। इससे वह नाराज हो गया और धमकाने लगा। जब अफसर नहीं मानें तो दोनों की हत्या कर दी। अजय के दो बेटे और एक बेटी हैं। गांव के पास उसकी 6 दुकानें हैं। 35 बीघा जमीन है। प्लांट भी उसके गांव में है। रामू का चचेरा भाई अभय प्रताप जिला पंचायत सदस्य रह चुका है। वह भाजपा के एक विधायक का करीबी बताया जाता है। आरोपी अजय प्रताप सिंह के चाचा राकेश सिंह सैंजनी गांव के प्रधान रह चुके हैं। उसकी मां किरन देवी कोटेदार हैं। पुलिस की लापरवाही सामने आई, FIR के बाद एक्शन नहीं लिया इस पूरे हत्याकांड में बदायूं पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई थी। आरोपी अजय सिंह आउटसोर्स कर्मचारी था। प्लांट में पराली की सप्लाई का ठेका लेता था। उसे नौकरी से निकालकर उसकी फर्म को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। इसके बाद अजय करीब 3 महीने से DGM सुधीर गुप्ता को जान से मारने की धमकी दे रहा था। सुधीर गुप्ता ने 4 फरवरी को मूसाझाग थाने में अजय के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि अजय लगातार धमका रहा है और उनका पीछा करता है। सुधीर गुप्ता इतने डर गए थे कि उन्होंने रिटायरमेंट के 5 साल पहले ही VRS के लिए आवेदन दे दिया था, जो मंजूर हो गया था। 31 मार्च को उनकी नौकरी का आखिरी दिन था। वहीं, हर्षित मिश्रा ने भी अपने ट्रांसफर के लिए आवेदन किया था। लेकिन, उससे पहले ही दोनों की हत्या कर दी गई। FIR के बाद भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की थी। SSP-CO हटा दिए गए थे हत्याकांड के बाद 13 मार्च को SSP डॉ. बृजेश कुमार सिंह और उझानी के CO डॉ. देवेंद्र कुमार पचौरी को हटा दिया गया था। SSP को पुलिस मुख्यालय में लॉजिस्टिक विभाग में तैनाती दी गई थी। उनकी जगह कासगंज की SP अंकिता शर्मा को भेजा गया था। वहीं, CO को DGP ऑफिस से अटैच किया गया था। उनकी जगह CO राहुल पांडेय को उझानी सर्किल की कमान सौंपी गई थी। आरोपी को दोनों पैरों में मारी गई गोली CO डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया- अजय सिंह ने वारदात में इस्तेमाल हथियार जंगल में छिपा दिया था। 13 मार्च को पुलिस उसे बरामदगी के लिए जंगल ले गई। इसी दौरान उसने झाड़ियों से तमंचा निकालकर पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसके दोनों पैरों में गोली लगी। पुलिस पूछताछ में अजय ने बताया- अफसर मेरे सम्मान को ठेस पहुंचाते थे। कभी मुझसे मेज साफ करवाते थे, तो कभी लोगों के सामने पानी लाने को कहते थे। बाद में साजिश कर मुझे नौकरी से निकलवा दिया। इलाके में मेरी छवि खराब कर दी। इसलिए दोनों को मार डाला। सुधीर नोएडा, हर्षित पीलीभीत के रहने वाले थे सुधीर गुप्ता के पिता का नाम दयाकिशन हैं। वे मूलरूप से नोएडा सेक्टर-50 के सिल्वर एस्टेट अपार्टमेंट के रहने वाले थे। फिलहाल बरेली में रह रहे हैं। वहीं, हर्षित मिश्रा पीलीभीत के पूरनपुर के के रहने वाले थे। उनकी शादी करीब 2 साल पहले हुई थी। उनके कोई बच्चा नहीं था। —————————————— ये खबर भी पढ़िए… झांसी में आकाशीय बिजली गिरने से बारुद फैक्ट्री में विस्फोट:मैनेजर के ड्राइवर की मौत, छत उड़ गई; 10Km दूर तक सुनाई दिया धमाका
झांसी में इंडो गल्फ फैक्ट्री (बारुद फैक्ट्री) में शुक्रवार देर शाम आकाशीय बिजली गिरने से भीषण विस्फोट हो गया। फैक्ट्री की छत उड़ गई और आग लग गई। फैक्ट्री का एक हिस्सा पूरी तरह जमींदोज हो गया। कुछ देर बाद मैनेजर स्टाफ के साथ अंदर गए। तभी दोबारा तेज धमाका हुआ। इस दौरान भारी चीज मैनेजर के ड्राइवर के सिर में जा लगी। वह लहुलुहान होकर गिर गए। इलाज के लिए ले जाते समय मौत हो गई। पूरी खबर पढ़िए…

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

Puri Khabar Yahan Padhein…

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *