बदायूं में नीलकंठ महादेव बनाम जामा मस्जिद मामले में अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी। यह मामला सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में विचाराधीन है। फिलहाल मुस्लिम पक्ष की बहस पूरी होनी है। इंतजामिया कमेटी की ओर से सुनवाई रोकने की पैरवी की जा रही है। इसके पीछे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला भी दिया गया है। नीलकंठ महादेव बनाम जामा मस्जिद का यह मामला साल 2022 से चल रहा है। अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश पटेल इस मुकदमे के मुख्य वादी हैं। उनके साथ कई अन्य अधिवक्ता और हिंदूवादी नेता भी मुकदमे में वादी बने हैं। मुकदमे में दावा किया गया है कि जामा मस्जिद स्थल पर पहले नीलकंठ महादेव का मंदिर था, जिसे बाद में आक्रांताओं ने मस्जिद में बदल दिया। यह भी कहा गया है कि वहां मौजूद शिवलिंग अब भी शहर के दरीबा मंदिर में है। इस प्रकरण में पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जा चुकी है। मुस्लिम पक्ष की बहस जारी है। इंतजामिया कमेटी का दावा है कि स्थल पर हमेशा मस्जिद ही थी और मंदिर का कोई अस्तित्व नहीं था। उनका यह भी तर्क है कि यह मामला सुनवाई के योग्य नहीं है। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में ऐसा कोई जिक्र नहीं है कि इस मामले में सुनवाई नहीं हो सकती। वर्तमान में बहस का मुख्य मुद्दा यही है कि यह मामला सुनवाई योग्य है या नहीं।

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