बदायूं के एचपीसीएल प्लांट में हुए दोहरे हत्याकांड के पीछे प्रशासनिक लापरवाही भी बड़ी वजह बनकर सामने आई है। मामले में दो सर्किल ऑफिसरों (सीओ) की टालमटोल से समय पर कार्रवाई नहीं हो सकी। डीएम अवनीश राय ने एसडीएम धर्मेंद्र सिंह और सीओ केके तिवारी को जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन बाद में यह थाना क्षेत्र उझानी सर्किल का निकला। इसके बाद दोनों सीओ के बीच क्षेत्राधिकार को लेकर जिम्मेदारी टालने का सिलसिला शुरू हो गया। दातागंज सीओ ने यह कहकर खुद को अलग कर लिया कि मामला उनके क्षेत्र का नहीं है। वहीं उझानी सीओ ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि जांच के निर्देश दातागंज सीओ को मिले हैं, इसलिए कार्रवाई भी वही करेंगे। इस तरह दोनों अधिकारियों ने जिम्मेदारी लेने से बचते हुए मामले को लंबित रखा। आरोपी के राजनीतिक संबंधों से बनी दूरी सूत्रों के मुताबिक आरोपी के स्थानीय विधायक से करीबी संबंध थे। इसी वजह से दोनों सीओ कार्रवाई करने से बचते रहे। उन्हें आशंका थी कि सख्ती करने पर राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ सकता है। एचपीसीएल प्लांट के डीजीएम सुधीर गुप्ता ने डीएम और एसएसपी से आरोपी अजय प्रताप की शिकायत की थी। उन्होंने बताया था कि आरोपी उन्हें घेरता है और उनकी जान को खतरा है। इसके बाद डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि दातागंज सीओ और एसडीएम मामले को खुद देखें। वहीं एसएसपी ने मूसाझाग थाना प्रभारी को जांच सौंपी थी। उझानी सीओ डॉ. देवेंद्र पचौरी को भी जांच में शामिल होने को कहा गया था। कार्रवाई नहीं होने से हुआ बड़ा हादसा इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद किसी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। दोनों सीओ क्षेत्राधिकार के विवाद में उलझे रहे और समय पर कदम नहीं उठाया गया। नतीजतन मामला दोहरे हत्याकांड में बदल गया। घटना के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए दोनों सीओ को जिम्मेदार माना। दातागंज सीओ को हटाकर बिल्सी भेज दिया गया, जबकि उझानी सीओ को लखनऊ मुख्यालय से अटैच कर दिया गया।

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