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फॉरेंसिक छात्रों को जॉब रेडी बनाने की तैयारी:पोस्टमार्टम से लेकर जेल की केस स्टडी तक का व्यवहारिक प्रशिक्षण पाएंगे

योगी सरकार अब फॉरेंसिक साइंस के विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यवहारिक प्रशिक्षण देने जा रही है। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज (यूपीएसआईएफएस) फॉरेंसिक की दिग्गज संस्थाओं से एमओयू साइन करने जा रहा है। इस पहल से छात्रों को थ्योरी के साथ ही, पोस्टमार्टम की बारीकियां, जेल में बंदियों की केस स्टडी, अपराध की जड़ें समझने और अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। सरकार का साफ मकसद है छात्रों को ‘जॉब रेडी’ बनाना है। ताकि वे क्राइम सीन पर पहले दिन से फॉरेंसिक विशेषज्ञ की तरह काम कर सकें। चार बड़े संस्थानों से होगा एमओयू केजीएमयू में पोस्टमार्टम से पंचनामा तक की ट्रेनिंग यूपीएसआईएफएस के डायरेक्टर जीके गोस्वामी ने बताया, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ फॉरेंसिक शिक्षा में थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल पर खास फोकस चाहते हैं। अब छात्र केवल क्लासरूम तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि असली केस की जांच का अनुभव लेंगे।” इस एमओयू के जरिए छात्रों को इंटर्नशिप, रिसर्च, केस स्टडी और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के व्यापक अवसर मिलेंगे। केजीएमयू के साथ एमओयू का सबसे अहम पहलू फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग में ट्रेनिंग है। यहां यूपीएसआईएफएस के छात्र पंचनामा से लेकर पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया को बारीकी से देखेंगे और समझेंगे। वे जान सकेंगे कि मौत किन परिस्थितियों में हुई, शरीर पर चोटों का वैज्ञानिक विश्लेषण कैसे किया जाता है और रिपोर्ट कैसे तैयार होती है। जेल जाकर समझेंगे अपराध की असली वजह जेल विभाग के साथ एमओयू से छात्रों को उत्तर प्रदेश की विभिन्न जेलों में जाकर बंदियों की केस स्टडी करने का मौका मिलेगा। वे समझ सकेंगे कि जमानत की प्रक्रिया कैसे चलती है, जेल का वातावरण कैसा होता है, अपराध के पीछे सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक कारण क्या होते हैं। यूपीएसआईएफएस के डिप्टी डायरेक्टर चिरंजीव मुखर्जी ने कहा, “यह अनुभव छात्रों को अपराध की जड़ समझने में मदद करेगा। फॉरेंसिक एक्सपर्ट के लिए सिर्फ सबूत इकट्ठा करना काफी नहीं, बल्कि अपराध क्यों हुआ, यह समझना भी जरूरी है।” टेक्नोलॉजी और रिसर्च पर जोर महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गोरखपुर के साथ एमओयू में छात्र-छात्राओं की इंटर्नशिप, फैकल्टी एक्सचेंज और आगे चलकर जॉइंट फॉरेंसिक लैब स्थापित करने का प्रावधान है। इस लैब में अत्याधुनिक उपकरणों से रिसर्च और परीक्षण होंगे। धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी, गांधीनगर के साथ छात्र और फैकल्टी दोनों का एक्सचेंज प्रोग्राम चलेगा। गुजरात के छात्र लखनऊ आएंगे तो यूपी के छात्र गांधीनगर जाकर ट्रेनिंग लेंगे। इससे राष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान का आदान-प्रदान होगा। नए सत्र से छात्रों को मिलेगा लाभ यूपीएसआईएफएस के अधिकारियों का कहना है कि ये एमओयू जल्द ही साइन हो जाएंगे। छात्रों को नई सत्र से इसका लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। यह पहल डिजिटल क्राइम, साइबर फ्रॉड, जटिल हत्या के मामलों और वैज्ञानिक जांच को नई मजबूती देगी। सरकार का मानना है कि मजबूत फॉरेंसिक सिस्टम ही अपराधियों को सजा दिलाने और निर्दोषों को बचाने का सबसे भरोसेमंद हथियार है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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