बेगूसराय शहर की सड़कों पर रोजी-रोटी कमाने वाले फुटपाथ दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों ने आज धरना दिया। भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (CITU) से जुड़े श्रमजीवी फुटपाथ दुकानदार संघ के बैनर तले आज जिला मुख्यालय के समाहरणालय स्थित दक्षिणी द्वार (हड़ताली चौक) पर जोरदार एक दिवसीय धरना दिया गया। जिला पार्षद सह सीटू के राज्य सचिव अंजनी कुमार सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में फुटकर विक्रेताओं ने हिस्सा लिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। धरना को संबोधित करते हुए अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि एक तरफ महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। वहीं, दूसरी ओर प्रशासन बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के गरीब दुकानदारों को फुटपाथ से उजाड़ रहा है। उन्होंने इसे अमानवीय करार देते हुए कहा कि यदि सरकार ने इन गरीबों के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की, तो हजारों परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे। फुटपाथ, पर रोजगार कर जीने वाले गरीबों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए हटाने पर रोक लगाई जाए। दुकानदार बोले- परिवार भूखे रहने को मजबूर फुटपाथ, फेरी और फुटकर रोजगार के सहारे हजारों गरीब परिवार अपनी आजीविका चलाते हैं। बावजूद इसके, समय-समय पर चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान में इन छोटे दुकानदारों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के हटाया जाता है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो जाती है। परिवार भूखे रहने को मजबूर हो जाता है। शहर में बढ़ती आबादी और जाम की समस्या को देखते हुए पूरे बेगूसराय शहर में फ्लाईओवर सड़क का निर्माण किया जाए। नगर निगम क्षेत्र में बिना पार्किंग व्यवस्था के यातायात नियमों के अनुपालन के नाम पर होने वाली परेशानी का समाधान निकाला जाए। शहरी गरीबों और फुटपाथ दुकानदारों को ससम्मान जीने का मार्ग प्रशस्त किया जाए। समस्या का स्थाई निराकरण करने की मांग प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बेगूसराय में सड़कों के संकीर्ण होने और पार्किंग की व्यवस्था न होने की सजा फुटपाथ दुकानदारों को दी जा रही है। परिवहन विभाग और नगर निगम की ओर से यातायात नियमों के पालन के नाम पर छोटे दुकानदारों को निशाना बनाया जाता है। प्रशासन को जाम की समस्या का हल संरचना में सुधार कर निकालना चाहिए, न कि गरीबों का पेट काटकर। नेताओं ने मांग की है कि जिला प्रशासन आंदोलनकारियों के शिष्टमंडल के साथ वार्ता का समय निर्धारित करे और एक ठोस प्रशासनिक हस्तक्षेप के माध्यम से इस समस्या का स्थाई निराकरण करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा।
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