फिल्म ‘धुरंधर 2’ को लेकर राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी और भाजपा समर्थित संगठनों के बीच फिल्म को लेकर घमासान मचा हुआ है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयान के बाद यह विवाद और गहरा गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा पैसे देकर फिल्में बनवा रही है। उनका कहना है कि ऐसी फिल्मों का मकसद दूसरे राजनीतिक दलों को बदनाम करना और जनता के बीच गलत संदेश फैलाना है। अखिलेश के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। फिल्म को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक बहस तेज हो गई है। करणी सेवा का पलटवार- जनता को भ्रमित कर रहा विपक्ष अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार करते हुए करणी सेवा के मैनपुरी जिलाध्यक्ष शंकर भदोरिया ने कहा कि इस तरह के आरोप जनता को भ्रमित करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष असल मुद्दों से भटक रहा है और जनता से अपना जुड़ाव खोता जा रहा है। भदोरिया ने कहा कि फिल्म पर राजनीति करने के बजाय जनता से जुड़े मुद्दों पर बात होनी चाहिए। बेरोजगारी, महंगाई और लंबी कतारों का उठाया मुद्दा शंकर भदोरिया ने कहा कि देश और क्षेत्र में बेरोजगारी, पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतें और आम लोगों की परेशानियां बड़े मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि लोग महंगाई और रोजमर्रा की दिक्कतों से जूझ रहे हैं, लेकिन राजनीतिक दल इन सवालों से ध्यान हटाकर फिल्मी विवाद खड़ा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के सामने आज जो असली संकट हैं, उन पर विपक्ष को गंभीरता से आवाज उठानी चाहिए। आलू किसानों का संकट बताया बड़ा मुद्दा भदोरिया ने इटावा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद और कन्नौज को ‘आलू बेल्ट’ बताते हुए कहा कि इस बार किसान भारी संकट में हैं। उनके मुताबिक, किसानों को उनकी आलू की फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे आर्थिक दबाव में हैं। उन्होंने कहा कि यह किसानों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है, लेकिन इस पर बात करने के बजाय फिल्म को लेकर राजनीतिक बयान दिए जा रहे हैं। अभिव्यक्ति की आजादी का दिया हवाला फिल्म विवाद पर शंकर भदोरिया ने अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला भी दिया। उन्होंने कहा कि फिल्मों में डिस्क्लेमर दिया जाता है और उसी आधार पर फिल्में बनाई जाती हैं। ऐसे में किसी फिल्म को लेकर अनावश्यक राजनीतिक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। सैफई महोत्सव पर भी कसा तंज भदोरिया ने समाजवादी पार्टी पर तंज कसते हुए कहा कि जब उनकी सरकार आएगी, तब वे अपनी पसंद के अनुसार फिल्में बनवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह वैसा ही होगा, जैसा पहले सैफई महोत्सव में बॉलीवुड कलाकारों के कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। उन्होंने कहा कि जनता अब इन मुद्दों को समझ रही है और उसे असल सवालों से भटकाना आसान नहीं है।

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