बिहार में फाइलेरिया की संक्रमण दर 17 प्रतिशत से अधिक है, जो देश में सबसे अधिक है। राज्य के सभी 38 जिले इस बीमारी की चपेट में हैं। पटना जिला स्वास्थ्य समिति ने इससे पीड़ित मरीजों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में बड़ी पहल की है। 80 ऐसे मरीजों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया गया है, जो बीमारी के कारण ग्रेड-3 या उससे ऊपर की गंभीरता से जूझ रहे हैं। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र प्रसाद ने बताया कि यह प्रमाणपत्र उन क्रोनिक मरीजों को दिया गया है, जिनकी सूजन स्थायी हो चुकी है और वे दैनिक कार्य करने में असमर्थ हैं। इससे उन्हें सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में फाइलेरिया के कुल मामलों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा 8 राज्यों से आता है। बिहार के बाद केरल और उत्तरप्रदेश का स्थान आता है। राज्य में हजारों की संख्या में हाथी पांव के मरीज हैं। 13 जिलों में करीब 3 करोड़ लोगों को फाइलेरियारोधी दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य और केंद्र सरकार का लक्ष्य 2027 तक बिहार को फाइलेरियामुक्त बनाना है। .अभियान के दौरान दवा का सेवन जरूर करें। .लगातार 5 वर्षों तक साल में एक बार दवा लेना अनिवार्य है। .फाइलेरिया मच्छरों के काटने से फैलता है। मच्छरदानी का प्रयोग करें। .यदि हाथीपांव हो गया है, तो सफाई के लिए एमएमडीपी किट का उपयोग करें। .परिवार के एक सदस्य को संक्रमण होने पर दूसरों को भी खतरा। पूरे परिवार को दवा खानी चाहिए।
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