मुजफ्फरनगर में फर्जी अस्पतालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की तैयारी है। राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने अवैध अस्पतालों और लगातार मिल रही शिकायतों पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाई। यह कार्रवाई रुड़की रोड स्थित एक अस्पताल में नवजात की मौत के बाद हुई। पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया और क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. इसमपाल सिंह को फोन पर कॉन्फ्रेंस में लिया। उन्होंने दोनों अधिकारियों को तत्काल फील्ड में उतरकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अवैध रूप से संचालित हो रहे अस्पतालों के खिलाफ टीम बनाकर व्यापक जांच अभियान चलाया जाए। मानकों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई हो। साथ ही, उन्होंने 7 दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा। दरअसल, हाल ही में रुड़की रोड स्थित एक अस्पताल में नवजात शिशु की मौत के बाद हुए हंगामे और लगातार मिल रही शिकायतों को मंत्री ने गंभीरता से लिया है। इसी मुद्दे पर कार्रवाई करते हुए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कार्रवाई न होने को लेकर सीएमओ से सवाल किया बातचीत के दौरान जब मंत्री ने अवैध रूप से अस्पतालों को लाइसेंस दिए जाने और कार्रवाई न होने को लेकर सीएमओ से सवाल किया, तो उन्होंने जिम्मेदारी क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. इसमपाल सिंह पर डाल दी। वहीं, जब मंत्री ने डॉ. इसमपाल सिंह से जवाब मांगा, तो उन्होंने भी मामला सीएमओ के पाले में डाल दिया। दोनों अधिकारियों के बीच जिम्मेदारी टालने की स्थिति पर मंत्री ने नाराजगी व्यक्त की। इसके बाद उन्होंने दोनों को एक साथ कॉन्फ्रेंस कॉल पर लेकर स्पष्ट चेतावनी दी कि लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री के सख्त रुख के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल है। अब यह देखना होगा कि निर्धारित समय सीमा में कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है।

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