भास्कर न्यूज | बक्सर जिले में नए वर्ष की शुरुआत हो चुका है। नया साल 2026 जहां कई ग्रहों के गोचर से अनेक अवसर पैदा करेगा। वहीं शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए भी अनेक अवसर लेकर आ रहा है। नए साल में शादी-विवाह के लिए शुभ मुहूर्तों की संख्या सामने आ गई है। पंचांग के अनुसार अंग्रेजी कैलेंडर 2026 में 5 फरवरी से 12 दिसंबर के बीच विवाह के कुल 59 शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। जबकि चातुर्मास और अधिक मास के कारण कुछ महीने मांगलिक कार्य बंद रहेंगे। ज्योतिषाचार्य डॉ. अशोक मिश्र के अनुसार फरवरी से दिसंबर के बीच मांगलिक कार्यों के कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। तिथियों को जोड़ने पर फरवरी से दिसंबर 2026 के बीच कुल 59 शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। वहीं इस वर्ष पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) भी लगेगा। पंचांग के अनुसार जब भगवान सूर्य और चंद्रमा अपनी चाल बदलते हैं, तो अधिक मास लगता है। इसके कारण पंचांग में 12 महीने की जगह 13 महीना जुड़ जाता है। अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है जो ढाई से तीन साल के बीच लगता है। इस वर्ष अधिक मास की शुरुआत 17 मई से होगी और इसका समापन 15 जून को होगा। इस अवधि में पहले दिन व्रत रखना विशेष रूप से शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास में एक दिन की पूजा सामान्य दिनों के 100 दिनों की पूजा के बराबर फल देती है। इन महीनों में शुभ मुहूर्त { फरवरी- 2026 में 5, 6, 8, 10, 12, 14, 19, 20, 21, 24, 25, 26 सहित कुल 12 मुहूर्त। { मार्च-2026 में 1, 3, 4, 7, 8, 9, 11, 12 सहित कुल 8 मुहूर्त। अप्रैल-2026 में 15, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29 सहित कुल 8 मुहूर्त। { मई-2026 में 1, 3, 5, 6, 7, 8, 13, 14 सहित कुल 8 मुहूर्त। { जून-2026 में 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29 सहित कुल 8 मुहूर्त। { जुलाई-2026 में 1, 6, 7, 11 सहित कुल 4 मुहूर्त। बवेबर-2026 में 21, 24, 25, 26 सहित कुल 4 मुहूर्त। { दिसंबर-2026 में 2, 3, 4, 5, 6, 11, 12 सहित कुल 7 मुहूर्त। अधिक मास के कारण पड़ेंगे 26 एकादशी व्रत इस वर्ष अधिक मास के कारण कुल 26 एकादशियां पड़ेगी। जिनमें पद्मिनी एकादशी और परम एकादशी भी शामिल हैं, जो बहुत शुभ हैं। अधिक मास के चलते इस वर्ष कुल 13 संकष्टी चतुर्थी होगी, जिनमें 3 अंगारकी चतुर्थी भी शामिल हैं। यह संयोग 6 जनवरी, 5 मई और 29 सितंबर को बनेगा। इस साल कुल 14 विनायक चतुर्थी पड़ेगी। इसके अलावा कई ग्रहों की चाल बदलने वाली है। मलमास में क्या करें और क्या न करें : मलमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नामकरण जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। माना जाता है कि इस समय शुभ कार्यों का पूरा फल नहीं मिलता। वहीं भगवान विष्णु की पूजा, जप, तप, दान-पुण्य और गौ-सेवा अत्यंत शुभ मानी जाती है। रामायण और गीता जैसे धार्मिक ग्रंथों का दान भी फलदायी माना गया है।
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