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प्रेमिका को चाकू से गोदकर मारने वाले को उम्रकैद:प्रयागराज में गला काटने के बाद सीने, पेट में किए थे 16 वार, कलाई भी रेती थी

प्रयागराज में 20 साल की प्रेमिका को चाकू से गोदकर मार डालने वाले संदीप भारतीया को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। अपर सत्र न्यायाधीश / विशेष न्यायाधीश एन.डी.पी.एस एक्ट रजनीश कुमार मिश्र ने यह फैसला सुनाया। साथ ही 50 हजार का जुर्माना भी लगाया।
एक जून 2018 को हुई थी वारदात
एडीजीसी क्रिमिनल भानुप्रताप सिंह ने बताया, यह खौफनाक वारदात एक जून 2018 को सरायममरेज में हुई थी। मृतका के भाई राकेश कुमार ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था रात में उसकी बहन कविता परिवार के अन्य लोगों के साथ बाहर सो रही थी। सुबह घर की महिलाएं खेत की ओर गईं तो खेत में बहन खून से लथपथ मृत पड़ी थी। उसका गला कटा हुआ था और शरीर पर धारदार हथियार से गोदने के निशान थे। उकसाने पर हत्या करने का दिया था बयान
घटना के छह दिन बाद पुलिस ने बहरिया के रहने वाले संदीप भारतीया व मृतका के रिश्तेदार गोपीचंद्र को गिरफ्तार किया। पुलिस ने दावा किया कि पूछताछ में आरोपी ने बताया कि कविता से उसके प्रेम संबंध थे। उसे शक था कि वह अन्य लोगों से भी बातचीत करती है और यह बात उसे मृतका के ही रिश्तेदार गोपीचंद्र ने बताई। इसी उकसावे में उसने उसकी हत्या कर दी। लगभग 6.5 साल चली सुनवाई
एक सितंबर 2018 को पुलिस ने इस मामले में संदीप और गोपीचंद्र के खिलाफ हत्या व दुष्प्रेरण की धारा में चार्जशीट दायर कर दी। 21 अगस्त 2019 को आरोपियों पर चार्ज फ्रेम हुए और इसके बाद लगभग 6.5 साल तक सुनवाई चली। 25 मार्च को संदीप को हत्या का दोषी करार दिया गया। जबकि पर्याप्त साक्ष्य न पाए जाने पर गोपीचंद्र को दोषमुक्त किया गया।
सोमवार को अदालत ने दोषी संदीप को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने यह फैसला एडीजीसी क्रिमिनल भानुप्रताप सिंह व हरिनारायण शुक्ला और अभियुक्त के अधिवक्ता को सुनकर और उपलब्ध सबूतों के अवलोकन के बाद दिया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 10 जबकि बचाव पक्ष की ओर से दो गवाह पेश किए गए। अदालत ने कहा, अदालत ने कहा कि प्रकरण में कोई प्रत्यक्षदर्शी साक्षी नहीं है और पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। मृतका को अंतिम बार आरोपी संदीप भारतीया के साथ जाते हुए देखा गया था, जिसके बाद उसकी हत्या हो गई। ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे कुछ साक्ष्य तकनीकी रूप से प्रमाणित नहीं हो सके, लेकिन उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्यों आरोपी की दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त हैं। मामला ‘विरल से विरलतम’ श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड के बजाय आजीवन कारावास उचित है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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