उत्तर मध्य रेलवे ने प्रयागराज-कानपुर सेक्शन के 190 रूट किलोमीटर पर स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ को सफलतापूर्वक लागू कर दिया है। यह प्रणाली रविवार, 22 मार्च को सक्रिय की गई। इसके लागू होने से मानवीय चूक के कारण होने वाले रेल हादसों पर अंकुश लगेगा। इस प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ गाड़ी संख्या 14163 (संगम एक्सप्रेस) के माध्यम से हुआ। उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक एन.पी. सिंह ने तकनीक की कार्यक्षमता जांचने के लिए स्वयं लोकोमोटिव में सवार होकर सूबेदारगंज से मनौरी स्टेशन तक ‘फुट प्लेट निरीक्षण’ किया। उन्होंने ट्रेन के इंजन में लगे ‘कवच’ के प्रदर्शन का बारीकी से आकलन किया। प्रारंभिक चरण में, यह सुरक्षा प्रणाली इस रूट पर चलने वाली आठ जोड़ी महत्वपूर्ण ट्रेनों में लागू की गई है। इनमें प्रयागराज एक्सप्रेस, संगम एक्सप्रेस, ऊंचाहार एक्सप्रेस, जोधपुर एक्सप्रेस, वंदे भारत, चौरी चौरा एक्सप्रेस, कानपुर-प्रयागराज अनवरगंज और प्रयागराज-बीकानेर एक्सप्रेस शामिल हैं। रेलवे प्रशासन ने बताया कि धीरे-धीरे इस मार्ग की अन्य सभी ट्रेनों और वंदे भारत के शेष रेक को भी इस सुरक्षा घेरे में लाया जाएगा। कवच प्रणाली को पूरी तरह सक्रिय करने से पहले रेलवे ने इसके कड़े और व्यापक परीक्षण किए थे। इन ट्रायल्स में WAP-7 लोकोमोटिव के साथ 8, 16 और 22 कोच वाली संरचनाएं, तथा 20 कोच वाली ‘वंदे भारत’ शामिल थीं। यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चौरी चौरा एक्सप्रेस के साथ 20,000 किलोमीटर से अधिक का ‘पैसेंजर ट्रायल रन’ सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिसमें सिस्टम की विश्वसनीयता साबित हुई। ‘कवच’ प्रणाली ‘मेक इन इंडिया’ पहल का एक उदाहरण है। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि यदि लोको पायलट किसी कारणवश खतरे के सिग्नल (रेड सिग्नल) को पार करता है या कोई मानवीय गलती होती है, तो यह सिस्टम स्वचालित रूप से ट्रेन में ब्रेक लगा देता है। यह आमने-सामने की टक्कर को रोकने और खराब मौसम या घने कोहरे के दौरान भी सुरक्षित ट्रेन परिचालन सुनिश्चित करने में सक्षम है।

Leave a Reply