सोमवार को प्रयागराज में प्रतियोगी छात्रों ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के खिलाफ प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्रों ने आयोग का घेराव कर 22 सूत्रीय मांगों को लेकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन का नेतृत्व संयुक्त प्रतियोगी छात्र हुंकार मंच के संयोजक पंकज पांडेय ने किया। छात्रों की प्रमुख मांग यूपीपीसीएस परीक्षा की तिथि में बदलाव को लेकर है। उनका कहना है कि 6 दिसंबर को प्रस्तावित परीक्षा जुलाई-अगस्त में आयोजित की जाए, जिससे अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके। इसके अतिरिक्त, चयनित अभ्यर्थियों को रैंक सुधार के नाम पर बार-बार परीक्षा में बैठने से रोकने की भी मांग की गई।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने आयोग पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि पहले दिए गए ज्ञापनों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग लगातार उनकी अनदेखी कर रहा है और 3 से 4 बार सूचना देने के बावजूद उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है। छात्रों ने एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि आयोग के सचिव और उपसचिव को भी यह जानकारी नहीं है कि अदालती मामलों में उनका प्रतिनिधित्व कौन कर रहा है। छात्रों ने इसे प्रशासनिक विफलता और गैर-जिम्मेदाराना रवैया करार दिया। दिसंबर 2026 में प्रस्तावित परीक्षा को पहले आयोजित कराने से संबंधित अदालती मामले पर भी आयोग से ठोस निर्णय लेने की मांग की गई। छात्रों का कहना है कि आयोग को इस विषय पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों के बीच भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। प्रदर्शनकारी छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस प्रदर्शन के बाद अब सभी की निगाहें आयोग की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

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