प्रतापगढ़ की विशेष एससी-एसटी अदालत ने एक पुराने हत्या और जानलेवा हमले के मामले में पांच आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 21-21 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी हेमंत कुमार ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर यह फैसला सुनाया। दोषियों में रामबाबू, छेदीलाल (पुत्रगण बिंदेश्वरी जायसवाल), श्याम सुंदर उर्फ कल्लू, त्रिभुवन और हरि नारायण (पुत्रगण छेदीलाल) शामिल हैं। ये सभी महान का पुरवा, जमेठी, थाना कोतवाली कुंडा के निवासी हैं। अदालत ने इन पांचों को हत्या, जानलेवा हमला और मारपीट के आरोपों में दोषी पाया। मामले में राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुरेश बहादुर सिंह ने पैरवी की। यह घटना 26 दिसंबर 2001 की सुबह करीब 7 बजे की है। वादी पंचम लाल के अनुसार, उनके चचेरे भाई मुनेश शौच के लिए घर से निकले थे। रास्ते में गांव के कुछ लोगों ने मुनेश को रोककर जातिसूचक गालियां दीं और जान से मारने की नीयत से हमला कर दिया। आरोपियों ने कट्टे और बंदूक से फायरिंग की, जिससे कई लोग घायल हो गए। हमले में वादी पक्ष के श्यामलाल, मुनेश, राकेश, राम दुलारे, राम सजीवन, गामा और शंकरी देवी को गंभीर चोटें आईं। गोलीबारी और मारपीट के दौरान गामा की हालत गंभीर हो गई, और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। श्यामलाल को भी लाठियों से बुरी तरह पीटा गया था। गांव वालों के पहुंचने पर आरोपी मौके से फरार हो गए। पीड़ित पक्ष ने किसी तरह जान बचाकर थाने पहुंचकर मामला दर्ज कराया था। सुनवाई के दौरान एक आरोपी शिव बाबू की मृत्यु हो चुकी थी। लंबी सुनवाई के बाद, अदालत ने इसे एक गंभीर अपराध माना। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों ने सामूहिक रूप से और सुनियोजित तरीके से हमला कर हत्या को अंजाम दिया था।

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