उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद राज बब्बर पर 1996 के लोकसभा चुनाव के दौरान लगाए गए सभी फर्जी मुकदमों को लखनऊ की MP/MLA विशेष अदालत ने खारिज करते हुए बरी कर दिया है। राज बब्बर को बड़ी राहत मिली है। विशेष अदालत ने राज बब्बर को 7 जुलाई 2022 को दोषी ठहराते हुए 2 साल की सजा सुनाई थी। सजा से बरी होने पर राज बब्बर ने कहा कि “मैं देश के लोकतंत्र और संविधान में अपनी आस्था रखता हूं। मैं हमेशा संविधान और लोकतंत्र की रक्षा तथा जनता के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष करता रहूंगा।” पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ लड़ा था चुनाव पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 1996 में लखनऊ लोकसभा से भाजपा के प्रत्याशी थे। उनके खिलाफ समाजवादी पार्टी ने पहली बार राज बब्बर को उतारा था। मतदान के दिन एक मतदान केंद्र पर फर्जी वोटिंग को लेकर पोलिंग अधिकारी से उनका विवाद हो गया था। पोलिंग अधिकारी ने वजीरगंज थाने में राज बब्बर के खिलाफ मारपीट और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए उनके विरुद्ध IPC की धारा 353, 332, 504 आदि में मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले का ट्रायल लखनऊ की MP/MLA विशेष अदालत में हुआ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सजा पर लगाई थी रोक विशेष अदालत ने 7 जुलाई 2022 को राज बब्बर को दोषी ठहराते हुए 2 साल की सजा और 8,500 रुपये का जुर्माना सुनाया था। राज बब्बर ने सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका लगाई थी। इस पर कोर्ट ने उनकी सजा पर स्टे लगा दिया था। इससे उन्हें चुनाव लड़ने आदि में राहत मिल गई थी, लेकिन केस पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था। राज बब्बर बोले- राजनीतिक दुर्भावना से दर्ज कराई गई थी FIR वर्तमान में राज बब्बर कांग्रेस पार्टी में सक्रिय हैं। केस से बरी होने पर राज बब्बर ने प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि उस समय के राजनीतिक परिदृश्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के उद्देश्य से मुझ पर इस प्रकार की कार्रवाइयां की गईं, जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण थीं। मैं कांग्रेस पार्टी का सिपाही हूं। देश के लोकतंत्र और संविधान में अपनी आस्था रखता हूं। मैं हमेशा संविधान और लोकतंत्र की रक्षा तथा जनता के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष करता रहूंगा। कांग्रेस नेताओं ने फैसले को न्याय की जीत बताया कांग्रेस नेताओं ने इस फैसले को न्याय की जीत करार दिया है और कहा कि यह साबित करता है कि 1996 में राज बब्बर की लोकप्रियता से भयभीत होकर विपक्ष ने उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की कोशिश की थी। राज बब्बर का राजनीतिक सफर राज बब्बर ने 1989 में जनता दल से राजनीति की शुरू की। 1994 से 1999 तक राज्यसभा सदस्य रहे। सपा में शामिल हो गए। पार्टी ने 1996 में लखनऊ से पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ प्रत्याशी बनाया, लेकिन हार गए। 1999 और 2004 में आगरा से दो बार लगातार लोकसभा चुनाव जीता। 2006 में मुलायम सिंह से मतभेद बढ़ा तो उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया। कांग्रेस में एंट्री: 8 सितंबर 2008 को सपा के बागी सांसद के रूप में कांग्रेस में शामिल हुए। 2009 लोकसभा में फतेहपुर सीकरी से कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। 2009 में अखिलेश ने दो सीटों से जीत के चलते फिरोजाबाद लोकसभा सीट से इस्तीफा दिया। उपचुनाव में राजबब्बर ने डिम्पल यादव को हराकर जीत दर्ज की। 2014 में गाजियाबाद से लोकसभा चुनाव में उतरे, लेकिन भाजपा से हार गए। 2015 में उत्तराखंड से राज्यसभा के लिए चुने गए। जुलाई 2016 से 2018 तक उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। 2019 में फतेहपुर सीकरी से चुनाव लड़े, लेकिन भाजपा प्रत्याशी से हार गए। 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने गुरुग्राम से चुनाव लड़े, लेकिन भाजपा से हार गए। —————- ये खबर भी पढ़ें- शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर चार्जशीट दाखिल होने तक रोक:बटुकों से यौन शोषण केस में हाईकोर्ट का फैसला, इंटरव्यू देने पर रोक लगाई शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की जमानत बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली। कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट दाखिल होने तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी नहीं होगी। यह फैसला हाईकोर्ट के जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच ने दोपहर बाद 3.45 बजे सुनाया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को जमानत देते हुए शर्तें भी लगाई हैं। सबसे अहम शर्त यह है कि दोनों पक्ष (शंकराचार्य और आशुतोष) मीडिया में बयानबाजी नहीं करेंगे और इंटरव्यू नहीं देंगे। शंकराचार्य के विदेश जाने पर भी रोक है। इसके लिए हाईकोर्ट से अनुमति लेनी होगी। अगर जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया जाता है, तो दूसरा पक्ष जमानत कैंसिलेशन अर्जी दे सकता है। पढ़ें पूरी खबर…

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