गोरखपुर में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने सख्त रुख अपनाते हुए पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की कार्यशैली के विरोध में 11 अप्रैल को लखनऊ में होने वाली प्रांतीय बैठक में बड़े आंदोलन का संकेत दिया है। समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि तब तक कर्मचारियों के खिलाफ चल रही कार्यवाहियां वापस नहीं ली गईं, तो प्रदेशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा। ऑनलाइन बैठक में पदाधिकारियों ने एकमत से निर्णय लिया कि 11 अप्रैल 2026 को लखनऊ में प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की जाएगी। इसी बैठक में आगे की रणनीति तय होगी और जरूरत पड़ने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन का औपचारिक ऐलान किया जाएगा। गर्मी में बिजली व्यवस्था प्रभावित करने का आरोप समिति ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसी भी कर्मचारी या अभियंता के खिलाफ निलंबन या दंडात्मक कार्रवाई की जाती है, तो प्रदेश के सभी जनपदों में बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी और इंजीनियर एक साथ सामूहिक सत्याग्रह शुरू करेंगे। समिति का कहना है कि ऐसी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। बैठक में प्रबंधन पर गंभीर आरोप भी लगाए गए। पदाधिकारियों ने कहा कि आगामी गर्मी के मौसम में बिजली व्यवस्था को जानबूझकर प्रभावित करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि निजीकरण के एजेंडे को आगे बढ़ाया जा सके। समिति ने दो टूक कहा कि बिजली कर्मी इस मंशा को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे। सभाओं के जरिए कर्मचारियों को किया जाएगा एकजुट रणनीति के तहत यह भी तय किया गया कि 11 अप्रैल से पहले प्रदेशभर में अलग-अलग स्तर पर सभाएं और बैठकें कर कर्मचारियों को एकजुट किया जाएगा, ताकि किसी भी आंदोलन को मजबूती से आगे बढ़ाया जा सके। लखनऊ में प्रस्तावित बैठक में प्रदेशभर से विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और सैकड़ों सक्रिय सदस्य शामिल होंगे। ऑनलाइन बैठक में पुष्पेंद्र सिंह, जीवेश नंदन, सीबी उपाध्याय, प्रभुनाथ प्रसाद, संगमलाल मौर्य, इस्माइल खान, संदीप श्रीवास्तव, करुणेश त्रिपाठी, ओम गुप्ता, राजकुमार सागर, विजय बहादुर सिंह और राकेश चौरसिया समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

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