लखनऊ में तकनीकी शिक्षा और उद्योग के बीच तालमेल मजबूत करने के उद्देश्य से द्वितीय ज़ोनल गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया। मेधा और तकनीकी शिक्षा विभाग के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य छात्रों को रोजगार के लिए बेहतर ढंग से तैयार करना था। सम्मेलन की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और स्वागत संबोधन के साथ हुई। मेधा की राज्य प्रमुख शीबा जोसेफ ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि शिक्षा को सीधे उद्योगों से जोड़ा जाए, ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हो सके। उद्योगों में प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पैनल चर्चा रही, जिसमें विशेषज्ञों ने पॉलिटेक्निक छात्रों के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। चर्चा के दौरान एक बड़ा निर्णय लिया गया कि अब छात्रों को अंतिम सेमेस्टर में छह महीने तक उद्योगों में प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा। इस पहल से उनकी दक्षता मजबूत होगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इस पैनल में सर्वेश्वर शुक्ला, नितिन झाम्ब, सासीधरन टी, आलोक पांडेय सहित लखनऊ और बाराबंकी के पॉलिटेक्निक संस्थानों के प्राचार्यों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि उद्योगों के साथ सीधा जुड़ाव ही छात्रों के भविष्य को सुरक्षित कर सकता है। पॉलिटेक्निक संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापन किए गए पैनल चर्चा के उपरांत एक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उद्योग प्रतिनिधियों और प्राचार्यों के बीच खुली चर्चा हुई। इसके बाद उद्योगों और पॉलिटेक्निक संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए। इस कार्यक्रम में लखनऊ, बाराबंकी और उन्नाव के 15 पॉलिटेक्निक संस्थानों के प्राचार्य और ट्रेनिंग प्लेसमेंट अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त, 20 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों ने भी इसमें भाग लिया।

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