देवरिया में पेंशनर्स ने केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन) वैधता अधिनियम 2025 के विरोध में कलेक्ट्रेट परिसर में काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। पेंशनर्स वेलफेयर कमेटी के बैनर तले एकत्र हुए सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा और अधिनियम को तत्काल वापस लेने की मांग की। कमेटी के अध्यक्ष श्रीराम त्रिपाठी ने बताया कि यह अधिनियम 25 मार्च 2025 से लागू किया गया था। इसे बिना किसी पूर्व सूचना के वित्त विधेयक के तहत लोकसभा में पेश कर उसी दिन पारित कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून पेंशनर्स का वर्गीकरण कर उनके बीच भेदभाव पैदा करता है, जो न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। प्रदर्शनकारी पेंशनर्स ने कहा कि यदि यह अधिनियम लागू रहता है, तो सेवानिवृत्ति की तिथि को पेंशन निर्धारण का आधार बनाया जाएगा। इससे विभिन्न वेतन आयोगों से पहले सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को लाभ से वंचित होना पड़ेगा। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि वर्तमान महंगाई के दौर में यह स्थिति पेंशनर्स के लिए गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर सकती है। ज्ञापन में डी.एस. नाकरा बनाम भारत संघ (1983) के ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया गया। इसमें कहा गया था कि पेंशन एक सामाजिक सुरक्षा का साधन है, जिसका उद्देश्य बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। इस निर्णय में पेंशन योजना में समानता पर विशेष जोर दिया गया था। पेंशनर्स ने यह भी बताया कि सातवें वेतन आयोग ने सभी पेंशनर्स के बीच समानता स्थापित करने की सिफारिश की थी, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार भी किया था। ऐसे में, नया अधिनियम उस भावना के विपरीत है। प्रदर्शन के दौरान पेंशनर्स ने घोषणा की कि वे 25 मार्च 2026 को “विरोध दिवस” के रूप में मनाएंगे और सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग दोहराई। ज्ञापन पर दिग्विजयनाथ सिंह, लालसा यादव, श्रीराम त्रिपाठी, ई. मारकण्डेय तिवारी, सुदर्शन कुशवाहा, नथुन राय सहित अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षर मौजूद थे।

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