बाराबंकी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री संग्राम सिंह वर्मा मंगलवार सुबह अपने पैतृक गांव जर्मापुर (हरख ब्लॉक) में पंचतत्व में विलीन हो गए। सोमवार दोपहर करीब 3 बजे लखनऊ के शेखर अस्पताल में उनका निधन हो गया था, जिसके बाद मंगलवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों से उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में लोग उमड़ पड़े। गांव की सड़कों से लेकर श्मशान स्थल तक भारी भीड़ मौजूद रही। परिवार के सदस्यों, समर्थकों और क्षेत्रवासियों ने नम आँखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। उनकी पुत्री रश्मि उर्फ पिंकी के पुत्र अरनव देव ने अपने नाना को मुखाग्नि दी। इस दौरान उनके छोटे भाई सुरेंद्र सिंह वर्मा सहित पूरा परिवार उपस्थित था। जर्मापुर गांव में सड़क किनारे स्थित उनके पूर्वजों के मंदिर के पास ही अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण इलाके में यातायात बाधित रहा। अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा, सपा के राष्ट्रीय सचिव व पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप, पूर्व मंत्री राकेश वर्मा, कांग्रेस के पूर्व सांसद डॉ. पीएल पुनिया, एमएलसी राजेश यादव, विधायक धर्मराज यादव, विधायक दिनेश रावत, एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत और जिला पंचायत अध्यक्ष राजरानी रावत सहित विभिन्न दलों के कई नेता और जनप्रतिनिधि पहुंचे। नेताओं ने संग्राम सिंह वर्मा को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनसेवा करने वाला नेता बताया। उन्होंने कहा कि उनके निधन से बाराबंकी ही नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति को भी अपूरणीय क्षति हुई है।दशकों तक सक्रिय राजनीति में रहे संग्राम सिंह वर्मा बाराबंकी सदर से कई बार विधायक चुने गए थे। मंत्री रहते हुए उन्होंने क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन से जिले में शोक की लहर है और लोग उनके योगदान को याद कर रहे हैं।

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