एसबीआई के एक बैंक फ्रॉड मामले में लखनऊ की CBI कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया है। सोमवार को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व ब्रांच मैनेजर समेत दो आरोपियों को पांच साल की सजा और कुल 13 लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया है। CBI कोर्ट, लखनऊ ने 30 मार्च 2026 को अशोक कुमार दीक्षित, जो उस समय SBI के कर्नलगंज शाखा (इलाहाबाद) में ब्रांच मैनेजर थे, और गोविंद राम तिवारी, जो M/s G.R. Associates के मालिक हैं, को दोषी ठहराते हुए पांच-पांच साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने दोनों पर कुल 13 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। 2003-04 में रची गई साजिश, फर्जी दस्तावेजों से लोन पास जांच में सामने आया कि वर्ष 2003-04 के दौरान अशोक कुमार दीक्षित ने गोविंद राम तिवारी के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची। इस साजिश के तहत 36 हाउसिंग लोन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वीकृत और वितरित किए गए। इन लोन की कुल राशि 1 करोड़ 69 लाख 45 हजार रुपये थी। बैंक को 1.81 करोड़ से ज्यादा का नुकसान CBI के अनुसार, इस घोटाले से बैंक को करीब 1 करोड़ 81 लाख 85 हजार रुपये का नुकसान हुआ, जबकि आरोपियों को अवैध लाभ पहुंचाया गया। फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोन पास कराने की पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी। 2005 में दर्ज हुआ केस, 2007 में चार्जशीट CBI ने 31 मई 2005 को इस मामले में केस दर्ज किया था। लंबी जांच के बाद 8 अगस्त 2007 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। लंबे ट्रायल के बाद अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में इस तरह के आर्थिक अपराधों को गंभीर मानते हुए सख्त सजा सुनाई, ताकि बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और विश्वास बना रहे।

Leave a Reply