सिनेमाघरों में 19 मार्च को रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर-2’ ने धमाल मचा रखा है। यूपी में इस फिल्म से जुड़े एक किरदार की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। वह किरदार है आतिफ अहमद का। कहा जा रहा है कि आतिफ के रूप में प्रयागराज के माफिया रहे अतीक अहमद का ISI कनेक्शन दिखाया गया है। यही वजह है कि सपा ने फिल्म को प्रोपेगेंडा करार दिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि यह फिल्म विपक्ष को बदनाम करने के लिए बनाई गई है। वहीं, मंगलवार को सपा की बागी विधायक पूजा पाल अखिलेश पर बरसीं। कहा- यूपी के सीएम योगी धुरंधर मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने अतीक-मुख्तार अंसारी जैसे माफिया का अंत किया। अतीक पर की गई कार्रवाई अखिलेश यादव को पसंद नहीं आई। अतीक के रूप में सपा का एक बड़ा फाइनेंसर मारा गया, जिससे अखिलेश यादव असंतुष्ट थे। भाजपा नेता और रिटायर्ड आईपीएस अफसर डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने भी फिल्म की तारीफ की। उन्होंने दावा किया कि बिहार के शहाबुद्दीन, यूपी के मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद के बीच करीबी संबंध थे। ये तीनों मिलकर जाली नोटों को बाजार में खपाते थे। इससे होने वाली कमाई गैंग को मजबूत करने में लगाई जाती थी। वहीं, मुख्तार अंसारी के भाई और गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी ने फिल्म पर आपत्ति जताई। कहा- अतीक अहमद के नाम पर फिल्म बनाकर उन्हें ISI (पाकिस्तान खुफिया एजेंसी) एजेंट दिखाया गया। जबकि वह अब इस दुनिया में नहीं हैं। पहले पढ़िए पूजा पाल की बात पूजा पाल ने कहा- अतीक केवल मेरा गुनहगार नहीं था। मेरे पति राजू पाल की हत्या कर उसने मेरी जिंदगी बर्बाद की, बल्कि हजारों परिवारों की जिंदगी तबाह की थी। अतीक ने लोगों की हत्याएं कीं, नशे के कारोबार से युवाओं को अपराधी बनाकर के समाज को नुकसान पहुंचाया। सपा के संरक्षण में अतीक और उसके गैंग ने नकली नोटों का कारोबार किया और देश की सुरक्षा से खिलवाड़ किया। अतीक सपा का बड़ा फाइनेंसर था
पूजा ने कहा- सपा को अतीक अहमद की सारी गतिविधियों के बारे में पता था। लेकिन, अतीक पर की गई कार्रवाई अखिलेश यादव को पसंद नहीं आई। अतीक अहमद के रूप में सपा का बड़ा फाइनेंसर मारा गया। इसीलिए रामगोपाल यादव कह रहे हैं कि सत्ता में आने पर अतीक की हत्या का बदला लिया जाएगा। ये शब्द भले ही रामगोपाल यादव के हों, लेकिन विचार अखिलेश यादव के हैं। सपा का पूरा सिस्टम ही हत्यारों और अपराधियों को बचाने के लिए काम करता है। अगर अखिलेश यादव की सरकार होती, तो मेरी हत्या हो जाती
पूजा ने कहा- अतीक के कब्र पर अखिलेश यादव फातिहा भी पढ़ने पहुंच जाते हैं। जब मैंने अतीक के गैंग के सफाए का स्वागत किया, तो मुझे भी पार्टी से निकाल दिया गया। मेरा साफ मानना है कि अगर मैं अतीक की हत्या होने के बाद भी जीवित हूं या रह सकी हूं, तो इसकी एकमात्र वजह हैं सीएम योगी। अगर अखिलेश यादव की सरकार होती या वो मुख्यमंत्री होते, तो अब तक मेरी हत्या हो गई होती। अब अफजाल अंसारी की बात गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी ने कहा- फिल्म बनाना मेकर्स का शौक हो सकता है। लेकिन, आम जनता इसे गंभीरता से देखती है। मैंने फिल्म नहीं देखी है। फिल्म इंडस्ट्री में लोग मनमर्जी की कहानियां बनाते हैं। जो लोग आज भी जिंदा हैं और नकली ‘बैकुंठ’ बनाकर बैठे हैं, उन पर कोई फिल्म नहीं बनती। ऐसे लोग दाऊद इब्राहिम के साथ मिलकर अपराध करते रहे हैं, लेकिन उन पर कोई कहानी नहीं दिखाई जाती। सांसद ने कहा- जब मेकर्स को फायदा उठाना होता है, फिल्म के टिकट बेचने होते हैं या सरकार से सहयोग लेना होता है, तब किसी का नाम प्रचार में उछाल दिया जाता है। ये कहानियां जरूरी नहीं कि सच्ची घटनाओं पर आधारित हों। फिल्म पहले से लिखी स्क्रिप्ट पर बनती है। मेकर्स इस बात पर ध्यान देते हैं कि फिल्म कैसे हिट होगी? कहानी को कैसे दिलचस्प बनाया जाए? संविधान की शपथ लेकर कानून की धज्जियां उड़ा रहे लोग
अफजाल अंसारी ने कहा- आम लोगों को समझ आ रहा है कि कुछ लोग संविधान की शपथ लेकर कानून की धज्जियां उड़ाते हुए सरकार में बैठे हैं। कुछ कर्मचारी गुलामी की मानसिकता में सरकारी नेताओं की इच्छा के अनुसार काम कर रहे हैं। लेकिन, उनके खिलाफ कानून अपना काम करेगा। फिल्म बनाना किसी का शौक हो सकता है, लेकिन अगर कोई गलत दिशा में जाएगा तो कार्रवाई जरूर होनी चाहिए। अब पूर्व IPS सूर्य शुक्ला की बात दावा- दंगे से राजनीति तक अतीक ने बढ़ाया नेटवर्क
रिटायर्ड आईपीएस डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने अपने कार्यकाल की एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 1986 में जब वे इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में तैनात थे, तब वहां दंगा हुआ था। जांच में सामने आया कि अतीक ने दंगे को भड़काने में भूमिका निभाई थी। पुलिस सख्त हुई तो उसके घर पर दबिश दी गई। लेकिन, अतीक भागकर मुंबई चला गया। इसके बाद वह धीरे-धीरे बड़ा माफिया बन गया। वह विवादित जमीन सस्ते में खरीदकर महंगे दाम पर बेचता था। जो विरोध करता, उसे धमकाया जाता या खत्म कर दिया जाता। उस समय उसके पक्ष में कोई राजनीतिक दबाव नहीं था। लेकिन, सांसद बनने के बाद उसने चुनावों में काफी पैसा खर्च करना शुरू कर दिया। पुलिस की सख्ती बढ़ने पर उसने राजनीति का सहारा लिया। अतीक ने सपा से टिकट लिया और बाद में अपना दल में शामिल हो गया। बसपा विधायक राजू पाल की हत्या इसलिए कराई गई, जिससे वह बिना विरोध चुनाव लड़ सके। बाद में इस मामले के गवाह उमेश पाल की भी हत्या कर दी गई। इसके बाद अतीक अहमद का अंत कैसे हुआ, यह सब जानते हैं। जानिए फिल्म को लेकर क्या है विवाद फिल्म ‘धुरंधर-2’ के सिनेमाघरों में रिलीज होते ही विवाद तेज हो गया है। विवाद का केंद्र ‘आतिफ अहमद’ नाम का किरदार है, जिसे अतीक अहमद से प्रेरित बताया जा रहा है। इसे लेकर राजनीतिक दलों, सामाजिक समूहों और दर्शकों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। फिल्म अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि यह किरदार यूपी के गैंगस्टर-राजनेता अतीक अहमद से मिलता-जुलता है। फिल्म में खुफिया एजेंसी से जुड़े संदर्भ भी दिखाए गए हैं, जिससे विवाद और बढ़ गया है। कई नेताओं ने ISI कनेक्शन वाले चित्रण को गलत और संवेदनशील मुद्दों को भड़काने वाला बताया है। ————————- ये खबर भी पढ़ेंः- धुरंधर-2 में अतीक अहमद की कहानी सच या प्रोपेगैंडा, ISI से कनेक्शन के सबूत मिले, नोटबंदी और फेक करेंसी वाली स्टोरी कितनी सच इलाहाबाद का चकिया। सफेद कुर्ता, सिर पर साफा पहने, चेहरे पर मुस्कान लिए एक माफिया। फिल्म धुरंधर-2 शुरुआती सीन से ही आपको सीधे यूपी के माफिया और सांसद रहे अतीक अहमद के दौर में ले जाएगी। 15 अप्रैल, 2023 को पुलिस के सुरक्षा घेरे में अतीक और उसके भाई अशरफ अहमद की हत्या कर दी गई थी। पढ़ें पूरी खबर…

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