इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कैसरबाग स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय (पुराना हाईकोर्ट परिसर) के आसपास अवैध अतिक्रमण पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने लखनऊ नगर निगम को तत्काल कार्रवाई करने और 7 अप्रैल को अगली सुनवाई पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की पीठ ने अधिवक्ता अनुराधा सिंह, अधिवक्ता देवांशी श्रीवास्तव और उनकी माता अरुणिमा श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया। याचिकाकर्ताओं ने अधिवक्ता सुजीत कुमार बाल्मीकि द्वारा उनके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज कराई गई प्राथमिकी को चुनौती दी थी। याचियों ने न्यायालय को बताया कि अधिवक्ता सुजीत कुमार बाल्मीकि के सीनियर श्रवण कुमार ने उनके घर के पास अवैध रूप से अपना चैंबर बना रखा है। आरोप है कि शाम को कोर्ट बंद होने के बाद वहां शराब पीकर हुड़दंग किया जाता है, जिसका विरोध करने पर कई बार गंभीर कहासुनी हुई। याचियों का दावा है कि इसी के चलते उनके खिलाफ फर्जी रिपोर्ट दर्ज कराई गई, जबकि घटना वाले दिन उन्होंने पहले ही रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ उक्त प्राथमिकी के आधार पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही करने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही, पुलिस को इस मामले में निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। इसी मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय के संज्ञान में आया कि पुराने हाईकोर्ट परिसर, जहां अब जिला एवं सत्र न्यायालय की अदालतें चलती हैं, के चारों ओर बेतरतीब अवैध अतिक्रमण हो गया है। इस अतिक्रमण में न केवल अधिवक्ताओं के चैंबर शामिल हैं, बल्कि पक्का निर्माण कर फोटोकॉपी और टाइपिंग की दुकानें भी हैं। यहां तक कि खाने-पीने की दुकानें भी अवैध रूप से संचालित हो रही हैं। न्यायालय ने पिछली सुनवाई के दौरान ही इस व्यापक अतिक्रमण को लेकर नगर निगम से रिपोर्ट मांगी थी, जिसके बाद अब तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आगे खबर डेस्क एडिटर में है

Leave a Reply