पीलीभीत नगर पालिका परिषद में भ्रष्टाचार और लापरवाही का एक नया मामला सामने आया है। एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने पालिका प्रशासन पर शासनादेशों की अवहेलना करने और मानसिक व आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया है। कर्मचारी का कहना है कि 37 साल की सेवा के बाद भी उन्हें अपने हक के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सेवानिवृत्त कर्मचारी शकील हसन खां (पुत्र स्व. रशीद हसन खां) ने अधिशासी अधिकारी (ईओ) को एक प्रार्थना पत्र सौंपा है। इसमें उन्होंने वित्त विभाग के शासनादेश संख्या 0-11/2024 का उल्लेख किया है। इस शासनादेश के अनुसार, 30 जून या 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को, जिनकी वेतन वृद्धि 1 जुलाई या 1 जनवरी को देय होती है, उन्हें ‘नोशनल वेतन वृद्धि’ का लाभ देते हुए पेंशन और ग्रेच्युटी का पुनर्गठन अनिवार्य है। शकील हसन 30 जून 2023 को सेवानिवृत्त हुए थे, जिससे वे इस लाभ के हकदार हैं। उन्होंने 5 नवंबर 2024 को ही विभाग में प्रार्थना पत्र जमा कर दिया था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी नगर पालिका प्रशासन ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है। शकील हसन ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए यह भी बताया कि उनके दो रिश्तेदारों के जन्म प्रमाणपत्र भी पिछले तीन महीनों से लंबित हैं। उनका आरोप है कि जानबूझकर उन्हें परेशान किया जा रहा है और बिना किसी सुविधा शुल्क के छोटे-छोटे काम भी रोके जा रहे हैं। शकील हसन ने कहा कि 37 साल की सेवा के बाद भी उन्हें अपने जायज हक के लिए भटकना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर पालिका में शासनादेशों की अनदेखी की जा रही है और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के प्रति अधिकारियों का रवैया उदासीन है।

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