राजधानी लखनऊ में लोक निर्माण विभाग (PWD) के एसी मुखर्जी ब्लॉक स्थित मुख्यालय कार्यालय के पास अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। शुक्रवार को लगी आग में नव निर्माण सड़कों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर और अभिलेख जलकर राख हो गए। घटना के बाद विभागीय कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आग लगने की तस्वीरें देखिये
नव निर्माण से जुड़े अहम दस्तावेज जलकर खाक
आग लगने की इस घटना में प्रदेश स्तर पर चल रहे सड़क निर्माण कार्यों से जुड़े कई अहम दस्तावेज नष्ट हो गए। बताया जा रहा है कि इसमें आगणन फाइलें, टेंडर से जुड़े कागजात और डिजिटल रिकॉर्ड भी शामिल हैं।
कार्यालय में रखे कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी आग की चपेट में आकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, करोड़ों खर्च के बावजूद लापरवाही
इस घटना ने पीडब्ल्यूडी कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।
सूत्रों के मुताबिक, कार्यालय की वायरिंग लंबे समय से खराब थी और कई बार एस्टीमेट बनने के बावजूद उसे ठीक नहीं कराया गया, जो आग लगने की संभावित वजह मानी जा रही है।
फायर ब्रिगेड को सूचना नहीं, विभाग ने खुद बुझाई आग
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आग लगने के बावजूद फायर ब्रिगेड को समय पर सूचना नहीं दी गई। विभाग के कर्मचारी और अधिकारी खुद ही आग बुझाने में जुटे रहे।
इस लापरवाही ने मामले को और गंभीर बना दिया है और अब इस पर जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है।
टेंडर प्रक्रिया पर भी उठे सवाल, जांच की मांग तेज
विभागीय सूत्रों का दावा है कि पिछले तीन महीनों में करोड़ों रुपए के टेंडर जारी किए गए, जिनमें कई मामलों में अनियमितताएं सामने आई थीं।
कुछ टेंडरों को निरस्त भी किया गया था और ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को काम दिए जाने के आरोप भी लगे थे। ऐसे में आग लगने की इस घटना ने टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अधिकारियों की चुप्पी, बढ़ी संदेह की स्थिति
घटना के बाद पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदार अधिकारी फिलहाल कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। उनकी चुप्पी ने मामले को और संदिग्ध बना दिया है।

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