उत्तर प्रदेश से काले हिरण मध्य प्रदेश की ओर बढ़ चले हैं। यह पलायन प्रयागराज जिले के मेजा तहसील में चांद खमरिया और महुली इलाके से हो रहा है। इस पठारी क्षेत्र में संरक्षित विलुप्तप्राय हो रहे काले हिरणों की तादात ज्यादा है। तीन साल पहले हुई गणना के मुताबिक यहां 500 से अधिक काले हिरण रहते हैं। इस इलाके में जल स्रोत के लिए बने हौज का सोलर पंप कुछ दिनों पहले चोरी हो गया। इस वजह से पानी की तलाश में हिरणों का झुंड मध्य प्रदेश की ओर बढ़ चला है। ये हिरण अभी लपरी नदी और उसके आसपास के गांवों में देखे जा रहे हैं। यह स्थान प्रयागराज शहर से लगभग 45-60 किलोमीटर दूर ट्रांस-यमुना बेल्ट में स्थित है, जिसे वन विभाग द्वारा विशेष रूप से ब्लैक बक कंजर्वेशन रिजर्व के रूप में विकसित किया गया है। 26 हेक्टेयर में करोड़ों रुपए कि लागत से बने इस क्षेत्र में पानी की कमी का अभी कोई विल्कप नहीं निकाला जा सका है। वन दरोगा रामचंद्र ने बताया कि पार्क में लगा सबमर्सिबल पंप चोरी हो गया था। उन्होंने जानकारी दी कि नया पंप लगाने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही पानी की आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। दरोगा ने यह भी बताया कि 4 दिन पहले अभयारण्य में लगा सोलर पंप और केबल भी चोर चुरा ले गए थे, जिसके बाद से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पाई है। कोई स्थायी समाधान नहीं मेजा विकास खंड के चांद खमरिया और महुली गांव के पठारी क्षेत्र में बने इस पार्क में वॉच टावर, नमक के गड्ढे, सड़कें, छोटे-बड़े तालाब, आवास, गार्ड रूम और सोलर पंप जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इन सुविधाओं के बावजूद, अभयारण्य के आसपास रहने वाले सैकड़ों हिरण पानी की कमी से जूझ रहे हैं। वन विभाग अभी तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं कर पाया है। चांद खम्हरिया के पूर्व प्रधान नारायण पांडेय और महुली गांव के मनोज कुमार, संगमलाल, कृष्ण मुरारी सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने पानी की तलाश में दर्जनों हिरणों को अभयारण्य के आसपास भटकते देखा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सोलर पंप चोरी की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने हर साल भारी बजट खर्च होने के बावजूद मौके पर कर्मचारियों की अनुपस्थिति और लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दुर्लभ प्रजाति के ब्लैक बक की रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। शिकारी कुत्तों का खतरा मार्च के अंतिम सप्ताह में ही गर्मी और तेज धूप ने यहां पर संरक्षित विलुप्तप्राय हो रहे काले हिरणों को परेशान कर दिया है। संरक्षित क्षेत्र में दूर-दूर तक सिर्फ सूखी झांड़ियां और पत्थर ही नजर आ रहे हैं। भूख तो बेहाल कर ही रही है। प्यास भी तड़पा रही है। ऐसे में भटक रहे इन हिरणों के शिकार का खतरा बढ़ गया है। कुत्तों के हमले का भी संकट नजर आने लगा है। 504 बीघे में है हिरनों का संरक्षित क्षेत्र यमुनापार में मेजा तहसील क्षेत्र के चांद खमरिया में यह कृष्णमृग संरक्षित क्षेत्र है, जिसका क्षेत्रफल करीब 126 हेक्टेयर यानी 504 बीघे है। यह संरक्षित क्षेत्र चांद खमरिया के साथ ही बगल के गांव महुली तक फैला है। संकटग्रस्त प्रजातियों में गिने जाने वाले कृष्णमृग सहित 500 से अधिक हिरण यहां रहते हैं। 2017 में सरकार ने घोषित किया था कृष्ण मृग संरक्षित क्षेत्र यमुनापार में मेजा के चांद खमरिया में लगभग 126 हेक्टेयर में यह कृष्ण मृग संरक्षित क्षेत्र स्थित है। काले हिरण पहाड़ी इलाकों, पथरीले मैदानों व जंगलों के मिश्रित क्षेत्र में रहना पसंद करते हैं। चांद खमरिया व उसके आसपास का इलाका भी ऐसा ही है, इस नाते सरकार ने इस क्षेत्र को वर्ष 2017 में कृष्ण मृग संरक्षित क्षेत्र घोषित किया था। कुलाचे भरते काले हिरणों की एक झलक देखने के लिए प्रयागराज के दूरस्थ इलाकों से ही नहीं रायबरेली, बांदा, प्रतापगढ़, कौशांबी, चित्रकूट के अलावा मध्य प्रदेश से भी बड़े पैमाने पर पर्यटक आते हैं। तीन साल पहले हुई थी गणना करीब तीन साल पहले इनकी गणना हुई थी। तब तक हिरणों की संख्या लगभग 500 के आसपास थी। अनुमान के आधार पर विभाग हिरणों की संख्या 600 से अधिक बता रहा है। इस साल जनवरी में अयोध्या स्थित आचार्य नरेंद्र देव विश्वविद्यालय की टीम से हिरणों की गणना कराने की तैयारी थी। हालांकि विभाग सिर्फ योजना ही बनाता रह गया। डीएफओ अरविंद कुमार का कहना है कि गणना को लेकर विश्वविद्यालय की टीम से फिर संपर्क किया जाएगा। फरवरी में एसडीएम ने सीमांकन का दिया था निर्देश यमुनापार स्थित मेजा के चांद खमरिया स्थित कृष्ण मृग संरक्षित क्षेत्र के कुल 126 हेक्टेयर में ग्राम सभा की 88 हेक्टेयर भूमि का सीमांकन होगा। इसके लिए फरवरी 2026 में मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने एसडीएम मेजा को निर्देश दिए। वह काला हिरन संरक्षित क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंची थीं। चांद खमरिया ब्लैक बक रिजर्व कंजर्वेशन की सुरक्षा, संवर्धन एवं समग्र विकास के लिए मंडलायुक्त ने मेजा तहसील में उच्च स्तरीय बैठक भी की। पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा एवं स्थानीय विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने को लेकर बैठक में चर्चा हुई। वन विभाग, लघु सिंचाई विभाग, भूमि सुधार विभाग, राजस्व विभाग, ग्राम विकास विभाग, पर्यटन विभाग, इक्रीसैट एवं विश्व वन्यजीव कोष के अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे थे।

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