यूपी में परमानेंट डीजीपी के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को प्रस्ताव दोबारा भेज दिया गया है। नए प्रारूप में भेजे गए प्रस्ताव में 1994 बैच तक के सभी अफसरों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें यूपी में पोस्टेड अफसरों के साथ केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात अफसरों के नाम भी शामिल हैं। इससे पहले 30 साल की सेवा पूरी करने वाले अफसरों के नाम भेजे गए थे। प्रपोजल में इन अफसरों के नाम यूपी सरकार के प्रपोजल में 1994 बैच तक के सभी अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें 1990 बैच की रेनुका मिश्रा, 1991 बैच के आलोक शर्मा, पीयूष आनंद, राजीव कृष्ण, पीसी मीना, 1992 बैच के आशुतोष पांडेय, आनंद स्वरूप, नीरा रावत शामिल हैं। इनके अलावा 1993 बैच के संजय सिंघल, एसबी शिरडकर, जकी अहमद, केएस प्रताप कुमार, राजीव सब्बरवाल, वितुल कुमार और 1994 बैच के बीके सिंह, अखिल कुमार, राजा श्रीवास्तव, डीके ठाकुर, सुजीत पांडेय, प्रकाश डी, एलवी एंटनी देव कुमार और जेएन सिंह का नाम शामिल हैं। इनमें आलोक शर्मा, नीरा रावत, एलवी एंटनी देव कुमार का सेवा काल 6 महीने से कम बचा है। संघ लोकसेवा आयोग की गाइडलाइन के अनुसार डीजीपी बनने के लिए कम से कम 6 महीने का कार्यकाल बाकी रहना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को है सुनवाई
यूपी सरकार ने प्रपोजल दोबारा इसलिए भेजा है, क्योंकि 1 अप्रैल (बुधवार) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। इसमें UPSC के साथ यूपी सरकार को भी परमानेंट डीजीपी की नियुक्ति के लिए जवाब देना है। ऐसे में यूपी सरकार ने मुख्य सचिव की ओर से प्रपोजल भेजकर गेंद UPSC के पाले में डाल दी है। तकनीकी कारणों से वापस कर दिया गया था प्रपोजल
प्रदेश सरकार ने 19 मार्च को डीजीपी के लिए UPSC को प्रपोजल भेजा था। लेकिन, नई गाइडलाइन के मुताबिक प्रपोजल न होने की वजह से उसे वापस कर दिया गया था। अब इसे दोबारा भेजा गया है। सूत्रों का कहना है कि UPSC प्रस्ताव का अध्ययन करने के बाद परमानेंट डीजीपी के लिए तीन नाम तय करने के लिए जल्द ही बैठक बुलाएगा। इसमें UPSC के अध्यक्ष के अलावा केंद्रीय गृह विभाग के अधिकारी, यूपी सरकार के मुख्य सचिव और गृह विभाग के प्रमुख सचिव शामिल रहेंगे। असीम अरुण बोले- आयोग की गाइडलाइन भेदभाव वाली
प्रदेश सरकार में मंत्री असीम अरुण ने दैनिक भास्कर से कहा- डीजीपी की नियुक्ति का जो तरीका है, उसमें बदलाव होना चाहिए। यह तरीका भेदभाव वाला है। आयोग वरिष्ठता के क्रम में अधिकारियों के नाम का चयन करता है। ऐसे में जो लोग 21-22 साल की उम्र में सर्विस में आए, डीजीपी बनने का उनका चांस अधिक रहेगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण कोटे से आए हुए अफसरों के डीजी बनने की संभावना कम रहेगी। इससे कई ऐसे काबिल अफसर जो इस पोस्ट के लिए डिजर्व करते हैं, उन्हें नियमों की वजह से डीजीपी बनने से वंचित कर दिया जाएगा। असीम अरुण खुद यूपी पुलिस के अफसर रह चुके हैं। पुलिस कमिश्नर के पद से इस्तीफा देकर वह राजनीति में आ गए थे। वह 2022 के विधानसभा चुनाव में कन्नौज से चुनाव लड़े और जीते थे। इसके बाद भाजपा की सरकार बनने पर मंत्री बनाए गए। यूपी में 4 साल से नहीं है स्थायी DGP यूपी में मुकुल गोयल के बाद से कोई भी स्थाई DGP नहीं बना है। 11 मई, 2022 को यूपी के तत्कालीन पूर्णकालिक डीजीपी मुकुल गोयल को पद से हटा दिया गया था। इसके बाद देवेंद्र सिंह चौहान को कार्यवाहक DGP बनाया गया था। चौहान का कार्यकाल 31 मार्च, 2023 तक रहा। उसके बाद राजकुमार विश्वकर्मा को कार्यवाहक DGP बनाया गया था। विश्वकर्मा के रिटायरमेंट के बाद विजय कुमार को कार्यवाहक DGP बनाया गया था। 31 जनवरी, 2024 को विजय कुमार के रिटायरमेंट के बाद प्रशांत कुमार कार्यवाहक डीजीपी बने थे। प्रशांत कुमार मई 2025 में रिटायर हुए थे। इसके बाद 1991 बैच के आईपीएस राजीव कृष्ण को कार्यवाहक DGP बनाया गया। राजीव कृष्ण का कार्यकाल जून, 2029 तक है।

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