आज छठ है। दीदी वीडियो कॉल पर दिखा रही थी, घर में उत्सव का माहौल है। मां ठेकुआ पका रही हैं। बुआ दऊरा सजा रही हैं। गाने गूंज रहे हैं। सब घाट पर जाने की तैयारी में जुटे हैं। डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए। पिछली बार मैं ही दऊरा लेकर घाट गया था, पर इस बार घर नहीं जा सका। रोजी-रोटी के लिए सब कुछ छूटता जा रहा। मां-बाबूजी, गांव-घर, खेत-खलिहान। परदेस में जो कुछ कमा रहा, सब कर्ज चुकाने और EMI भरने में ही चला जा रहा। दैनिक भास्कर पलायन के इसी दर्द को बयां करता एक विशेष छठ गीत लाया है- ‘बिहारे में दे दीं रोजगार हे छठी मइया।’ गीत देखने-सुनने के लिए ऊपर दिए वीडियो पर क्लिक करें…
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