DniNews.Live

पति की मृत्यु पर एक्स-पार्टी (एकतरफा) तलाक रद्द नहीं:कोर्ट ने कहा, पति या पत्नी की मृत्यु के बाद वैवाहिक विवाद समाप्त हो जाता है

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पति या पत्नी की मृत्यु के बाद एक्स-पार्टी (एकतरफा) तलाक के डिक्री को रद्द नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में मुकदमा आगे नहीं बढ़ सकता और इसे पुनर्जीवित करना कानूनन संभव नहीं है।
जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने यह निर्णय देते हुए फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें 30 साल पुराने तलाक को बहाल कर दिया गया था। पत्नी की मौत पर दूसरी के साथ रहने लगा था मामले में पहली पत्नी का विवाह 1991 में एक्स-पार्टी डिक्री के जरिए समाप्त हो गया। इसके बाद पति ने दूसरी शादी कर ली और अलग परिवार के साथ रहने लगा। वर्ष 2023 में पति की मृत्यु के बाद दूसरी पत्नी को वैध विधवा मानते हुए उसे सभी सेवा लाभ दिए गए। इसके बाद पहली पत्नी ने भी लाभ पाने के लिए दावा किया और फैमिली कोर्ट में एक्स-पार्टी डिक्री रद्द करने की मांग की। फैमिली कोर्ट ने देरी माफ करते हुए डिक्री रद्द की, जिसे दूसरी पत्नी और उसके बच्चों ने हाइकोर्ट में चुनौती दी। हाइकोर्ट ने पाया कि पहली पत्नी ने डिक्री को चुनौती देने के लिए 30 साल से अधिक समय तक कोई कदम नहीं उठाया और यह आवेदन पति की मृत्यु के तुरंत बाद किया गया, जिससे उसकी मंशा पर भी सवाल उठता है। तलाक की सूचना नहीं, यह साबित नहीं हाईकोर्ट ने कहा कि पहली पत्नी यह साबित नहीं कर पाई कि उसे तलाक की कार्यवाही की सूचना नहीं दी गई। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार पति या पत्नी की मृत्यु के बाद वैवाहिक विवाद समाप्त हो जाता है और उसे आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। अदालत ने कहा, “ऐसे हालात में पुराने मुकदमे को बहाल करने से दूसरी पत्नी का वैध अधिकार प्रभावित होता है, जबकि उसे अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं मिलेगा।” हाइकोर्ट ने यह भी माना कि तलाक के बाद हुई दूसरी शादी पूरी तरह वैध थी। इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने दूसरी पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

Puri Khabar Yahan Padhein…

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *