उन्नाव शहर में पटरी दुकानदारों ने उन्हें हटाए जाने की कार्रवाई का विरोध किया है। स्थानीय दुकानदारों ने DM को संबोधित एक प्रार्थना पत्र सौंपकर अपनी आजीविका बचाने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि प्रशासन द्वारा की जा रही इस कार्रवाई से उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सुरेश, ललित, शहनाज और अनिल सहित अन्य दुकानदारों ने अपने प्रार्थना पत्र में बताया कि वे वर्षों से नाले और सड़क किनारे पटरी पर छोटी-छोटी दुकानें लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। इन दुकानों से ही उनके घर का खर्च चलता है और उनका परिवार पूरी तरह इसी पर निर्भर है। दुकानदारों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें दुकानें हटाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया हैकि सरकार द्वारा बनाए गए मार्ग और फुटपाथ के किनारे कई दुकानदार लंबे समय से अपनी दुकानें संचालित कर रहे हैं। दुकानदारों ने बताया कि उन्होंने पूर्व में भी संबंधित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से इस संबंध में गुहार लगाई थी। तब उन्हें आश्वासन दिया गया था कि जब तक कोई वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं कराया जाएगा,तब तक उन्हें नहीं हटाया जाएगा। दुकानदारों ने आरोप लगाया कि अब अचानक कार्रवाई की बात कहकर उन्हें हटाने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। उनका कहना है कि दुकान हटने के बाद परिवार के भरण-पोषण के लिए उनके पास कोई अन्य साधन नहीं बचेगा। कई दुकानदारों ने यह भी बताया कि वे कर्ज लेकर दुकान चला रहे हैं और हटाए जाने की स्थिति में उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। दुकानदारों ने सिटी मजिस्ट्रेट राजीव राज सेमांग की है कि उन्हें हटाने से पहले वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए या फिर मानवीय आधार पर कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाए। इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने और अतिक्रमण हटाने के अभियान के तहत यह कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने यह भी आश्वासन दिया कि प्राप्त शिकायत और प्रार्थना पत्र की जांच कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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