वैश्विक ‘ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट’ (GBBC) 2026 में बिहार ने पक्षी संरक्षण और नागरिक विज्ञान के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। 13 से 16 फरवरी तक चले इस अभियान में प्रकृति प्रेमियों ने रिकॉर्ड संख्या में पक्षियों का दस्तावेजीकरण किया है। इस महाअभियान में नालंदा जिले ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे राज्य में पहला स्थान हासिल किया है। पर्यावरणविदों के लिए सबसे सुखद खबर राजगीर से आई है, जहां पक्षी अवलोकन के अंतिम दिन वन गंगा के निकट पहाड़ियों पर उड़ान भरते हुए अत्यंत संकटग्रस्त ‘भारतीय गिद्ध’ को देखा गया है। पक्षीविदों के लिए विलुप्ति का दंश झेल रहे भारतीय गिद्ध का राजगीर के आसमान में नजर आना किसी बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि से कम नहीं है। पक्षी प्रेमी राहुल कुमार, शिवनाथ कुमार और अविनाश कुमार ने इस दुर्लभ गिद्ध को देखा और इसका डाटा दर्ज किया। शिवनाथ कुमार ने बताया कि समय-समय पर नालंदा में भारतीय गिद्ध का देखा जाना सुखद अनुभूति है, लेकिन इन क्षेत्रों से इनकी मूल आबादी का पूरी तरह खत्म हो जाना बेहद दुखद है। भारतीय गिद्ध अत्यंत संकटग्रस्त श्रेणी में आते हैं, जिनकी वयस्क आबादी अब पूरे विश्व में मात्र 5 से 15 हजार के बीच ही बची है। उन्होंने राजगीर की अनुकूल वादियों में गिद्धों की आबादी को फिर से स्थापित करने की दिशा में ठोस कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। 235 पक्षी प्रजातियों की पहचान जीबीबीसी के राज्य समन्वयक राहुल कुमार ने बताया कि प्रारंभिक परिणामों के अनुसार इस वर्ष बिहार में पक्षी विविधता के दस्तावेजीकरण ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। इस वर्ष राज्य के 19 जिलों के 49 बर्ड वॉचर्स (पक्षी अवलोकनकर्ताओं) ने अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए 547 चेकलिस्ट अपलोड कीं और कुल 235 पक्षी प्रजातियों की पहचान की। इस शानदार प्रदर्शन के साथ भारत में बिहार 20वें स्थान पर रहा। वहीं, नालंदा जिले ने राज्य स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त कर गौरव बढ़ाया है। जिले के मात्र 12 प्रतिभागियों ने इन चार दिनों में 128 सूचियां तैयार कर 145 पक्षी प्रजातियों को दर्ज करने में सफलता पाई है। बताते चलें कि भारत ने भी इस वर्ष विश्व स्तर पर 52 हजार से अधिक चेकलिस्ट के साथ दूसरा और 1,087 प्रजातियों की पहचान कर तीसरा स्थान हासिल किया है।
राजगीर और आस-पास के क्षेत्रों में गिद्ध के अलावा बोनेली ईगल, इंडियन नाइटजार, सवाना नाइटजार, रूफस-टेल्ड लार्क, गडवाल, नॉर्दन पिनटेल, नॉर्दन शोवलर, यूरेशियन विजन, रूडी शेल्डक, बार-हेडेड गूज, पेल बिल्ड फ्लावरपेकर और ग्रे-ब्रेस्टेड प्रिनिया जैसे कई दुर्लभ और आकर्षक पक्षी भी सामान्य रूप से देखे गए। ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट विश्व स्तर पर शहरों, गांवों और प्राकृतिक स्थलों में पक्षियों के अवलोकन का एक समन्वित नागरिक विज्ञान प्रयास है। इसमें भाग लेने वाले आम नागरिकों और विद्यार्थियों ने अपने आसपास देखी गई चिड़ियों की गणना कर ‘ई-बर्ड’ (eBird) मोबाइल एप पर अपनी चेकलिस्ट अपलोड की। पक्षियों की सटीक पहचान के लिए ‘मर्लिन बर्ड आईडी’ एप का सहारा लिया गया, जो आवाज और फोटो के जरिए चिड़ियों को पहचानने में मदद करता है। बिहार राष्ट्रीय स्तर पर पक्षी संरक्षण में सशक्त भूमिका निभाएगा साल 2021 में जहां बिहार से मात्र 33 चेकलिस्ट और 133 प्रजातियां दर्ज हुई थीं, वहीं 2026 में यह आंकड़ा 547 चेकलिस्ट और 235 प्रजातियों तक पहुंच जाना एक बड़ी सफलता है। यह डिजिटल टूल्स के प्रभावी उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के प्रति आम लोगों की बढ़ती चेतना का प्रत्यक्ष प्रमाण है। विशेषज्ञों का मानना है कि नागरिकों की निरंतर भागीदारी से आने वाले वर्षों में बिहार राष्ट्रीय स्तर पर पक्षी संरक्षण में और भी सशक्त भूमिका निभाएगा। अवलोकन कार्यक्रम के माध्यम से पक्षी प्रेमियों ने बिहार को पक्षी अवलोकन के क्षेत्र में भारत के पटल पर प्रदर्शित करने का कार्य किया है। इस वर्ष पक्षी प्रेमी राहुल कुमार, शिवनाथ कुमार, अविनाश कुमार, सुवादीप कुडू, हर्षिता प्रकाश, ज्ञानचन्द्र ज्ञानी, आशुतोष आंनद, शहवाज बेगेटा, एसके इमरान, वर्तिका पटेल, राजकुमार मंडल, शिवम कुमार, अभिषेक शर्मा, संदीप कुमार, ऋषि उपाध्याय,साक्षी, मिथलेश कुमार राम, गौरव सिन्हा, मधु सिंह, अजय कुमार सिन्हा, मिरणाल कौशिक, ऐश्वर्या पाटिल, राणा मुखर्जी, पिंटू कुमार यादव, कबीर कबीर ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और इसे सफल बनाया।
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