उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से जुड़े 25 साल पुराने भूमि आवंटन मामले में नूतन ठाकुर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत मिल गई है। वह इस मामले में सह-अभियुक्त हैं। यह मामला वर्ष 1999 का है, जब अमिताभ ठाकुर देवरिया में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उस समय औद्योगिक क्षेत्र में नूतन ठाकुर के नाम पर एक प्लॉट आवंटित कराया गया था। इसमें कथित तौर पर पहचान छिपाकर धोखाधड़ी की गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि दस्तावेजों में नाम और पति का विवरण बदलकर दर्ज किया गया था। इस मामले में सितंबर 2025 में लखनऊ के तालकटोरा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसे बाद में देवरिया सदर कोतवाली स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद 10 दिसंबर 2025 को यूपी पुलिस ने अमिताभ ठाकुर को चलती ट्रेन से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हालांकि, फरवरी 2026 में उन्हें जिला जज की अदालत से जमानत मिलने के बाद रिहा कर दिया गया। पति की गिरफ्तारी के बाद नूतन ठाकुर पर भी गिरफ्तारी की आशंका थी। उन्होंने पहले देवरिया जिला न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख किया। नूतन ठाकुर के अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान यह माना कि मामला काफी पुराना है। अदालत ने कहा कि जांच में सहयोग आवश्यक है, लेकिन गिरफ्तारी जरूरी नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान की। उच्च न्यायालय के इस फैसले से नूतन ठाकुर को राहत मिली है। मामले की जांच प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।

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