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नालांदा में मिडिल स्कूल डीहा के प्रभारी प्रिंसिपल सस्पेंड:50 हजार रुपए रिश्वत लेने का आरोप; डीएम कुंदन कुमार ने दिए विभागीय कार्रवाई के आदेश

नालंदा जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ जिला पदाधिकारी (डीएम) कुंदन कुमार ने कड़ा एक्शन लिया है। अनुकंपा के आधार पर नौकरी दिलाने के नाम पर 50 हजार रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में थरथरी प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय डीहा के प्रभारी प्रधानाध्यापक (विशिष्ट शिक्षक) अनिल कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साक्ष्यों के आधार पर डीएम ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के भी सख्त निर्देश दिए हैं, जिससे शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला पदाधिकारी को शिकायत मिली थी कि प्रभारी प्रधानाध्यापक अनिल कुमार की ओर से अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए अभ्यर्थियों से अवैध वसूली की जा रही है। शिकायतकर्ता ने सबूतों के साथ बताया कि आरोपी शिक्षक ने फोन-पे के माध्यम से 40,000 और 10,000 कैश यानी कुल 50 हजार रुपए की रिश्वत ली है। इस गंभीर शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए डीएम कुंदन कुमार ने मामले की जांच कराई। डिजिटल ट्रांजैक्शन और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर आरोपी शिक्षक को तत्काल निलंबित कर दिया गया। कड़ी कार्रवाई की चेतावनी जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सरकारी सेवक द्वारा आधिकारिक कार्य के बदले रिश्वत मांगना ‘बिहार सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली’ के तहत गंभीर कदाचार और भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। ऐसे भ्रष्ट आचरण वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। इस कड़ी कार्रवाई के साथ ही जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने जिले के उन सभी अभ्यर्थियों से एक विशेष अपील की है, जिनका अनुकंपा के आधार पर चयन हुआ है या जिनका मामला अभी लंबित है। अगर अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर किसी भी कर्मी, पदाधिकारी या अन्य व्यक्ति द्वारा उनसे अवैध रूप से राशि (रिश्वत) की मांग की जाती है, तो वे सीधे जिलाधिकारी से मिलकर पूरी वस्तुस्थिति से अवगत करा सकते हैं। ऐसे मामलों में दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। इसके अलावा, डीएम ने नालंदा के जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) को भी सख्त हिदायत दी है। उन्होंने डीईओ को अपने कार्यालय की कार्य संस्कृति में गुणात्मक सुधार लाने और पूरी व्यवस्था को दुरुस्त करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यालय का कार्य त्वरित गति से और तय समय-सीमा के भीतर संपादित होना चाहिए, ताकि फाइलों को अटकाकर अवैध वसूली करने जैसी प्रवृत्तियों पर पूरी तरह से लगाम लग सके।


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