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नालंदा में 39 किसानों का डीबीटी पोर्टल से रजिस्ट्रेशन रद्द:पराली जलाने पर कार्रवाई, पांच साल तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा

नालंदा जिले में फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर चल रहे विशेष अभियान के तहत एक बार फिर सख्त कार्रवाई हुई है। नौ प्रखंडों के 39 किसानों का डीबीटी पोर्टल से रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है। इन किसानों को अगले पांच वर्षों तक कृषि विभाग की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा। जिले में पराली जलाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कृषि विभाग की ओर से लगातार जागरूकता अभियान और चेतावनी के बावजूद किसान फसल अवशेष में आग लगाने से बाज नहीं आ रहे। गुरुवार को आठ प्रखंडों के 44 किसानों पर कार्रवाई के बाद शुक्रवार को फिर 39 किसानों पर गाज गिरी है। अब तक करीब 80 किसानों का निबंधन रद्द किया जा चुका है। इस बार कार्रवाई की जद में बेन, चंडी, अस्थावां, बिंद, थरथरी, रहुई, सिलाव, राजगीर और हरनौत प्रखंडों के किसान आए हैं। हरनौत में सबसे अधिक उल्लंघन पराली जलाने के मामले में हरनौत प्रखंड सबसे आगे है। इस सीजन का पहला मामला भी यहीं से सामने आया था। शुक्रवार को अकेले हरनौत के नौ किसानों पर कार्रवाई हुई, जबकि राजगीर प्रखंड के भी नौ किसान इस सूची में शामिल हैं। थरथरी में छह, बेन और रहुई में चार-चार, अस्थावां में तीन, बिंद में दो, जबकि चंडी और सिलाव में एक-एक किसान का निबंधन रद्द किया गया है। प्रखंड स्तर पर बने धावा दल, हर खेत पर निगरानी कृषि विभाग ने पराली जलाने पर पूर्ण विराम लगाने के लिए विशेष जांच अभियान शुरू किया है। सभी प्रखंडों में धावा दल का गठन किया गया है। जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर के पदाधिकारी तथा पंचायत कर्मी सुबह से शाम तक निरीक्षण कर रहे हैं। जहां भी खेत में फसल अवशेष जलता मिल रहा है, तुरंत संबंधित किसान का पता लगाकर कार्रवाई की जा रही है। पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हरनौत कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. उमेश नारायण उमेश ने बताया कि पराली जलाने से विभिन्न जहरीली गैसें निकलती हैं जो वायुमंडल को प्रदूषित करती हैं। इससे आंख, सांस, फेफड़ों की बीमारियां और कैंसर तक हो सकता है। साथ ही मिट्टी के मित्र कीट मर जाते हैं और खेत बांझ होकर उपज प्रभावित होती है। मशीनों पर अनुदान के बावजूद जागरूकता की कमी सरकार फसल अवशेष प्रबंधन के लिए एसएमएस, हैप्पी सीडर, स्ट्रा बेलर, सुपर सीडर जैसी मशीनें अनुदानित दर पर उपलब्ध करा रही है। किसान इन अवशेषों को पशुचारा के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण वे खेतों में आग लगा रहे हैं। जिला कृषि पदाधिकारी नितेश कुमार ने कहा कि जहां से भी शिकायतें आ रही हैं, जांच कराई जा रही है। दोषी किसानों पर कार्रवाई जारी रहेगी। किसान फसल अवशेष का उपयोग पशुचारा के रूप में करें, क्योंकि पराली जलाने से मिट्टी और पर्यावरण को काफी नुकसान होता है।


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