मिर्जापुर में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने आरोपी को 10 साल के कठोर कारावास और 15,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला शहर कोतवाली क्षेत्र के एक मामले में नौ साल बाद आया है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट न्यायालय ने तरकापुर निवासी राममूरत सोनकर को दोषी ठहराया। पुलिस के अनुसार, यह मामला वर्ष 2017 में दर्ज किया गया था। 27 जनवरी 2017 को वादिनी ने अपनी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर भगाने और दुष्कर्म करने के आरोप में राममूरत सोनकर के खिलाफ तहरीर दी थी। तहरीर के आधार पर थाना कोतवाली शहर में आरोपी के खिलाफ धारा 363, 366, 376 भारतीय दंड संहिता (भादवि) और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। मामले की सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) न्यायालय, मिर्जापुर ने आरोपी राममूरत सोनकर को दोषी मानते हुए 10 वर्ष के कारावास और 15,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना अदा न करने पर आरोपी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक के नेतृत्व में महिला संबंधी अपराधों में प्रभावी कार्रवाई और सशक्त पैरवी के अभियान के तहत इस मामले में पुलिस और अभियोजन पक्ष ने मजबूत पैरवी की। अभियोजन अधिकारी सनातन कुमार, विवेचक उपनिरीक्षक बसंतलाल, कोर्ट मुहर्रिर आरक्षी पंकज गौड़, महिला आरक्षी गुंजन यादव और पैरोकार आरक्षी सोनू राव की प्रभावी पैरवी से यह सजा सुनिश्चित हो सकी। पुलिस की इस कार्रवाई को महिला अपराधों के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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