जौनपुर में चैत्र नवरात्र के चौथे दिन मां शीतला के कूष्मांडा स्वरूप की विधि-विधान से पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन किए और फल, मेवा तथा बरफी का भोग लगाया। मां का श्रृंगार गेंदा, अढ़वल और सफेद गुलाब की माला से किया गया। चौकियां धाम में चतुर्थी तिथि पर माताओं ने अपनी पुत्रियों की सलामती के लिए तालाब में स्नान कर पूजन-अर्चन किया। मंदिर के महंत विवेकानंद पंडा ने बताया कि नवरात्र के चौथे दिन स्वाति नक्षत्र, वैधृति योग और रवियोग का शुभ संयोग बन रहा है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, जब सृष्टि नहीं थी और चारों ओर अंधकार था, तब माता कूष्मांडा ने अपने ईषत हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसलिए इन्हें सृष्टि की आदिस्वरूपा कहा जाता है। इस देवी की आठ भुजाएं हैं, जिसके कारण इन्हें अष्टभुजा भी कहते हैं। उनके सात हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र और गदा हैं, जबकि आठवें हाथ में सभी सिद्धियों व निधियों को देने वाली जप माला है। देवी का वाहन सिंह है। संस्कृत में कुम्हड़ा को कुष्मांड कहते हैं, इसी से इस देवी का नाम कूष्मांडा पड़ा। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस टीम लगातार मुस्तैद रही।

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