मिर्जापुर में चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन विंध्याचल धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। भक्त आज आदिशक्ति माँ कूष्माण्डा के स्वरूप की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं। माता विंध्यवासिनी के दरबार में सुबह से ही दर्शन-पूजन का सिलसिला जारी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्माण्डा की विशेष आराधना की जाती है। इस दिन भक्त सुख-समृद्धि और शांति की कामना के साथ माँ का ध्यान करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब माँ कूष्माण्डा ने अपनी हल्की मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदि शक्ति और मूल स्वरूप माना जाता है। विंध्य क्षेत्र में विंध्य पर्वत और पावन गंगा नदी के संगम तट पर स्थित श्रीयंत्र पर विराजमान माँ विंध्यवासिनी का आज कूष्माण्डा रूप में पूजन किया जा रहा है। विद्वान आचार्य पं. राजन मिश्र ने बताया कि माँ कूष्माण्डा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक दूर होते हैं। इससे आयु, यश, बल और आरोग्य की प्राप्ति होती है। सच्ची भक्ति से माँ शीघ्र प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। नवरात्रि के चौथे दिन धाम में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। देश के कोने-कोने से आए भक्त माँ के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। सुरक्षा कर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मोर्चा संभाला हुआ है। श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि माँ कूष्माण्डा की कृपा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। विंध्य धाम में माँ के दिव्य दर्शन कर श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं और “जय माँ विंध्यवासिनी” के जयकारों के साथ अपनी आस्था प्रकट कर रहे हैं।

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