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नगर निगम ने गृहकर बकायदारों के 8 भवन किए सील:मेरठ में 78 को दी चेतावनी, छूट के बाद भी टैक्स जमा नहीं कर रहे लोग


                 नगर निगम ने गृहकर बकायदारों के 8 भवन किए सील:मेरठ में 78 को दी चेतावनी, छूट के बाद भी टैक्स जमा नहीं कर रहे लोग

नगर निगम ने गृहकर बकायदारों के 8 भवन किए सील:मेरठ में 78 को दी चेतावनी, छूट के बाद भी टैक्स जमा नहीं कर रहे लोग

मेरठ नगर निगम द्वारा गृहकर वसूली को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बड़े बकायेदारों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है की। निगम की टीम ने शहर के विभिन्न इलाकों में अभियान चलाकर आठ भवनों और प्रतिष्ठानों को सील कर दिया, जबकि 78 भवन स्वामियों को अंतिम चेतावनी जारी की गई।
हालांकि, कई स्थानों पर कार्रवाई का विरोध भी देखने को मिला। पल्लवपुरम, शास्त्रीनगर और बागपत रोड क्षेत्रों में विरोध के चलते निगम टीम को बिना कार्रवाई लौटना पड़ा। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी एसके गौतम के निर्देशन में कंकरखेड़ा, शास्त्रीनगर और मुख्यालय जोन में कर अधीक्षकों के नेतृत्व में टीमें गठित की गईं। प्रवर्तन दल के साथ कर अधीक्षक अतुल कुमार और विनय शर्मा की टीम ने अभियान की शुरुआत गढ़ रोड क्षेत्र से की। मेडिकल कॉलेज के पास स्थित नाथू सिंह की सीमेंट की दुकान को 2.76 लाख रुपये के बकाया पर सील किया गया। वहीं, 6.55 लाख रुपये बकाया होने पर किशन कांत भारद्वाज के टाइल्स गोदाम पर भी कार्रवाई हुई।
राजवंश विहार में 2.57 करोड़ रुपये के भारी बकाया पर महादेव सचदेवा के प्रतिष्ठान को सील किया गया, जबकि 3.2 लाख रुपये बकाया पर दीपक सचदेवा के प्रतिष्ठान पर भी ताला लगाया गया। इसके अलावा मेडिकल क्षेत्र में मित्तल जनरल स्टोर को एक लाख से अधिक बकाया पर सील किया गया। तेजगढ़ी चौराहे पर बीर सिंह के प्रतिष्ठान, शर्मा बैंड, राजू एग प्वाइंट और आराध्या ट्रेडर्स पर कुल 3.48 लाख रुपये के बकाये के चलते कार्रवाई की गई। कार्रवाई के असर से बकायेदारों में हड़कंप मच गया और कंकरखेड़ा जोन में करीब 25 लाख, शास्त्रीनगर में 30 लाख तथा मुख्यालय जोन में 25 लाख रुपये जमा कराए गए।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार 50 हजार रुपये से अधिक बकाया वाले भवनों पर सीलिंग की कार्रवाई जारी रहेगी। शहर में एक लाख से अधिक भवन स्वामियों पर गृहकर बकाया है।
नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने अपील करते हुए कहा कि भवन स्वामी समय पर गृहकर जमा कर 20 प्रतिशत की छूट का लाभ उठाएं। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा निर्धारित 150 करोड़ रुपये के लक्ष्य को पूरा करना निगम के लिए चुनौती बना हुआ है, ऐसे में बड़े बकायेदारों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।


Sourse: Dainik Bhaskar via DNI News

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