भास्कर न्यूज | जहानाबाद दवा बाजार में नकली धंधेबाजों का प्रवेश हो गया है। बाजार में नकली दवाओं के बिक्री को लेकर दवा व्यवसाईयों को गंभीर चिंता है। दरअसल उक्त आशय की चिंता यहां रविवार को कूर्मा संस्कृति मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल के सभागार में आयोजित बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन यानी बीसीडीए के मगध डिवीजन की बैठक में उभरकर सामने आई। वक्ताओं ने कहा कि खासकर महंगी व ज्यादा उपयोग में आने वाली दवा नकली धंधेबाजों के निशाने पर होते हैं। कई ऐसी दवाएं बाजार में कंपनी के न्यून्तम दर से कहीं अधिक सस्ती बेची जा रही है। ऐसा तभी संभव है जब कोई कंपनी की आड़ में नकली दवाओं का निर्माण व उसकी माकेर्टिंग कर रहा हो। संघ ने विमर्श के दौरान बताया कि नकली धंधेबाजों की संख्या अब भी बहुत कम है। हर मंडी में ऐसे अपराधियों की संख्या कम है। हर जिले के प्रमुख मंडियों में ऐसे धंधेबाज सस्ती दवाओं के लोभ दिखाकर सक्रिय हैं। समय रहते इसका कारगर निदान संभव हो सकता है। संघ नेताओं ने कहा कि मसला गंभीर होने के साथ जटिल भी है जिसका निदान सिर्फ औषधि प्रशासन के पास ही हो सकता है। संघ नेताओं ने कहा कि दवाइयों की गुणवत्ता की जांच किसी भी आम आदमी के लिए संभव नहीं है। यहां तक कि दवा व्यवसायी भी दवा के असली व नकली होने की पहचान नहीं कर सकते हैं। लेकिन काम से अधिक डिस्काउंट होते ही संबंधित दवा व्यवसायियों को सतर्क हो जाना चाहिए। वैसे नकली से बचने का सबसे प्रभावी तरीका कंपनी के अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर से ही पक्के बिल पर दवा की खरीद बिक्री की जानी चाहिए। कंपनियों के अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर से खरीद से नकली दवाओं के धंधे पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। पेशे की गरिमा बनाए रखने का लिया गया संकल्प संघ नेताओं ने आम दवा व्यवसायियों की नियमों की जटिलता को ले आने वाली व्याप्त समस्याओं पर भी चिंता के बावजूद पेशे की गरिमा को सर्वोपरि रखने की अपील की। संघ नेताओं ने कहा कि दवा व्यवसाय अन्य व्यवसाय से अलग है। इस पेशे की गरिमा का सीधा संबंध सिर्फ व्यवसायिक हितों से नहीं बल्कि पीड़ित मानवता से जुड़ा है। पेशे में नकली दवा के धंधेबाज अपराधियों के प्रवेश की आहट मिल रही है। हालांकि दवा व्यवायियों की इस पूरी चिंता को दूर करने के लिए संघ चाहकर भी अकेले कुछ नहीं कर सकता लेकिन औषधि प्रशासन की सक्रियता से नकली दवा धंधेबाजों पर प्रभावी शिकंजा कसा जा सकता है। सेवा से जुड़ा है व्यवसाय कूर्मा संस्कृति मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल के चेयरमैन शंकर कुमार ने कहा कि दवा व्यवसाय पीड़ित मानवता की सेवा से जुड़ा एक महान पेशा है। इसकी गरिमा की हर हाल में रक्षा की जानी चाहिए। उन्हें नहीं पता कि कौन सी दवा असली व कौन नकली हो सकती है लेकिन जब दवा व्यवसायी इस गंभीर मसले पर चिंतित हैं तो जाहिर तौर पर व्यापक जनहित में इसका निश्चित रूप से निदान किया जाना चाहिए। उन्होने कहा कि औषधि प्रशासन को दवा व्यवसायियों की समस्या पर गौर करने की जरूरत है।
https://ift.tt/y0KGkde
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live