मुरादाबाद में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र फेडरेशनों ने बुधवार को नई श्रम संहिताओं के विरोध में ‘काला दिवस’ मनाया। श्रमिक संगठनों ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन कर सरकार के 1 अप्रैल से इन्हें लागू करने के फैसले पर नाराजगी व्यक्त की। धरने के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने लगातार विरोध के बावजूद इन श्रम संहिताओं को लागू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने इन्हें ‘श्रम विरोधी’ और ‘नियोक्ता समर्थक’ बताया। यूनियन नेताओं ने कहा कि श्रम सुधार और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के नाम पर लाई गई ये चारों संहिताएं श्रमिकों के वर्षों के संघर्ष से मिले अधिकारों को कमजोर करती हैं। इनमें 8 घंटे कार्य दिवस, कार्यस्थल पर सुरक्षा, यूनियन बनाने का अधिकार, सामूहिक सौदेबाजी और हड़ताल का अधिकार शामिल हैं। नेताओं ने यह भी बताया कि सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा, ठेका कर्मचारियों के नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, बोनस, ग्रेच्युटी और पेंशन जैसे मुद्दों पर भी नई संहिताएं श्रमिक हितों के प्रतिकूल हैं। धरना स्थल से यूनियनों ने मांग की कि नई श्रम संहिताओं के लागू होने पर तत्काल रोक लगाई जाए और उन्हें वापस लिया जाए। उन्होंने भारतीय श्रम सम्मेलन जल्द बुलाकर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों से वार्ता करने की भी अपील की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो उनका आंदोलन जारी रहेगा।

Leave a Reply