‘धुरंधर में दिखाया यूपी में कैसे गैंगवार होते थे’:लखनऊ में किरण बेदी बोलीं- सीएम योगी के राज में उत्तर प्रदेश सुरक्षित, पुलिस सशक्त


                 'धुरंधर में दिखाया यूपी में कैसे गैंगवार होते थे':लखनऊ में किरण बेदी बोलीं- सीएम योगी के राज में उत्तर प्रदेश सुरक्षित, पुलिस सशक्त

‘धुरंधर में दिखाया यूपी में कैसे गैंगवार होते थे’:लखनऊ में किरण बेदी बोलीं- सीएम योगी के राज में उत्तर प्रदेश सुरक्षित, पुलिस सशक्त

‘धुरंधर मूवी में देख लीजिए, यूपी में कैसे गैंगवार होते थे। उसके मुकाबले अब उत्तर प्रदेश बहुत सुरक्षित हो गया है। सीएम योगी के राज में उत्तर प्रदेश में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। पुलिस सशक्त हुई है। यूपी के सुरक्षित होने से बेटियां भी सुरक्षित हुई हैं। बस जरूरत है उन्हें स्कूल भेजने की। उन्हें स्कूल भेजें, उन्हें पढ़ने दें। उनकी शादी में जल्दबाजी न करें ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।’ यह कहना है देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी का। वह 6 अप्रैल को लखनऊ पहुंचीं। यहां उन्होंने गोमतीनगर स्थित होटल ताज में आयोजित फिक्की फ्लो लखनऊ चैप्टर के कार्यक्रम में महिलाओं को सम्मानित किया। इस मौके पर भास्कर रिपोर्टर ने उनसे करंट मुद्दों, लड़कियों की शिक्षा, यूपी की कानून व्यवस्था पर बात की। पढ़िए बातचीत के मुख्य अंश… सवाल : जब आप आईपीएस बनीं, तब देश में कांग्रेस की सरकार थी। अब वर्तमान सरकार में आप कितना सुधार देखती हैं? जवाब : उत्तर प्रदेश इस वक्त ‘उत्तम प्रदेश’ है। यहां वर्तमान में जो सुरक्षा की भावना है, उसका कोई मुकाबला ही नहीं है। आप ‘धुरंधर’ फिल्म देख लीजिए, उसमें साफ दिखाया गया है कि जिस तरीके से गैंगवार पहले होते थे, उसके मुकाबले अब प्रदेश बहुत सुरक्षित है। उत्तर प्रदेश अब प्रगति के रास्ते पर चल रहा है। यह अब सिर्फ उत्तर प्रदेश नहीं, बल्कि ‘उत्तम प्रदेश’ है क्योंकि यह सुरक्षा के मामले में उत्तम है। इसका पूरा श्रेय यहां की पुलिस और विशेष रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जाता है। सवाल : ग्रामीण शिक्षा की बात की जाए, तो लड़कियां अब भी कहीं न कहीं पीछे छूट जाती हैं। उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए क्या करना चाहिए? जवाब : जो लड़कियां पीछे छूट जाती हैं, उसका मुख्य कारण उनके माता-पिता की सोच है। अगर माता-पिता उत्साहित रहें, तो इस वक्त स्कूलों की कोई कमी नहीं है। स्कूल उपलब्ध हैं, बस अभिभावकों को चाहिए कि वे बेटियों को स्कूल भेजें और उन्हें पढ़ने दें। उनकी शादियों में जल्दबाजी न करें। उन्हें कोई न कोई स्किल (हुनर) सीखने दें ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने घर-परिवार को बेहतर तरीके से चला सकें। सवाल : आने वाले समय में प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी हैं, तो महिलाओं के लिए आप क्या कहेंगी? जवाब : महिलाओं को अगर समाज और प्रशासन के साथ जोड़ा जाए, तो पूरे समाज का भला होता है। महिलाएं वे मुद्दे उठाती हैं जो सबके हित में होते हैं, चाहे शिक्षा हो, चिकित्सा हो या आर्थिक और ग्रामीण विकास। उनके जुड़ने से विकास सुनिश्चित होता है। सवाल : महिला आरक्षण लागू होने के बाद महिलाओं की सुरक्षा और भागीदारी बढ़ाने के लिए क्या व्यावहारिक कदम जरूरी हैं? जवाब : इसके लिए पंचायत ट्रेनिंग प्रोग्राम बहुत जरूरी हैं। जो महिलाएं चुनकर (इलेक्ट होकर) आती हैं, उनकी ट्रेनिंग जरुरी है। पंचायत ऑफिसर्स को उनके साथ मिलकर काम करना होगा। मेरा मानना है कि अगर डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर्स और प्रशासन पंचायत ट्रेनिंग प्रोग्राम पर ध्यान दें, तो ग्रामीण विकास में बहुत बड़ा बदलाव आएगा। सवाल : नए आपराधिक कानून (BNS, BNSS) लागू हो चुके हैं। इनके प्रभावी इस्तेमाल के लिए क्या पुलिस को अतिरिक्त ट्रेनिंग और सुधार की जरूरत है? जवाब : हां, इन कानूनों को गहराई से जानना बहुत जरूरी है। इसमें ‘वीडियोग्राफी’ का प्रावधान बहुत महत्वपूर्ण है। वीडियोग्राफी एक ठोस सबूत है जिसे कोर्ट के सामने रखा जा सकता है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कोई यह नहीं कह पाएगा कि सुबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है; उस वक्त की वीडियोग्राफी खुद सच बोलेगी।


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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