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देवी भागवत और श्रीमद्भागवत परस्पर पूरक, विरोध की धारणा पूरी तरह भ्रमजन्य है : प्रो. जयशंकर झा

प्रखंड अंतर्गत दहियार रन्ना पंचायत के शहरू गांव में बुधवार को सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। यह आयोजन सार्वजनिक बम पूजा समिति के तत्वावधान में किया जा रहा है, जो 31 दिसंबर से 6 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा। कथा के प्रथम दिन में कथावाचक प्रो. जयशंकर झा ने देवी भागवत और श्रीमद्भागवत के परस्पर संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वेदव्यास रचित इन दोनों महापुराणों को परस्पर विरोधी मानना एक भ्रम है, जिसकी जड़ संकीर्ण मानसिकता में निहित है। प्रो. झा ने स्पष्ट किया कि देवी भागवत और श्रीमद्भागवत एक-दूसरे के पूरक हैं, न कि विरोधी। वैष्णवों की आराध्या श्रीकृष्ण प्रिया राधा जी का विस्तृत वर्णन देवी भागवत में मिलता है, जबकि श्रीमद्भागवत में उनका प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं है। ऐसे में दृष्टिभेद किए बिना इन ग्रंथों में एकत्व मानने से न केवल अठारह महापुराणों की गणना संबंधी विवाद समाप्त होंगे, बल्कि वैष्णव और शाक्त परंपराओं के बीच की दूरी भी कम होगी। प्रो. जयशंकर झा ने धर्म और अधर्म के स्वरूप पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि कलियुग में भक्ति महारानी की व्यथा को समझने के लिए भागवत कथा अत्यंत आवश्यक है। इसी क्रम में उन्होंने आत्मदेव और धुंधकारी के परस्पर विरोधी चरित्रों के माध्यम से यह समझाया कि सत्संग और भक्ति से जीवन का उद्धार संभव है, जबकि कुसंग और अधर्म विनाश का कारण बनते हैं। कथा के दौरान श्रोतागण पूरी तरह भावविभोर नजर आए।प्रवचन के बीच-बीच में पारस पंकज और उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत प्रसंगपरक भजनों ने कथा को और भी जीवंत बना दिया। भजनों की मधुर प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूमते नजर आए और पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया। कथा स्थल पर “हरि बोल” और “राधे-राधे” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस ज्ञानसत्र का शुभारंभ संस्कृत विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर साहित्य विभाग के वरीय प्राध्यापक एवं श्यामा मंदिर के न्यासी डॉ. संतोष कुमार पासवान द्वारा वैदिक एवं पौराणिक मंगलाचरण से किया गया।


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