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देवी भागवत और श्रीमद्भागवत परस्पर पूरक

देवी भागवत और श्रीमद्भागवत परस्पर एक दूसरे के पूरक है। इन दो ग्रन्थों को परस्पर विरोधी मानना एक भ्रम है। वैष्णवों की परम आराध्या श्रीकृष्ण राधा का वर्णन देवी भागवत में विस्तार से किया गया है, जबकि श्रीमद्भागवत में इनके स्पष्ट उल्लेख का अभाव सर्वविदित है। अतः दृष्टिभेद किए बिना इनमें एकत्व मान लेने से महापुराणों की अठारह की गिनती में भी समस्या नहीं आएगी। साथ ही वैष्णवों और शाक्तों की दूरी भी घटेगी। बहेड़ी प्रखंड के शहरु गांव में आयोजित 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन भागवत की महत्ता पर प्रकाश की डालते हुए कथावाचक प्रो.जयशंकर झा ने धर्म और अधर्म के स्वरूप का विस्तृत वर्णन किया। कलियुग में भक्ति महारानी की व्यथा भागवत कथा से दूर करने के क्रम में आत्मदेव एवं धुंधकारी के परस्पर विरोधी चरित्र पर प्रकाश डाला गया। प्रवचन के दौरान पारस पंकज व उनकी टीम के द्वारा प्रस्तुत प्रसंगपरक भजनों से बड़ी संख्या में जुटे श्रोतागण ओत-प्रोत होते रहे। संस्कृत विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर साहित्य विभाग के वरीय प्राध्यापक सह श्यामा मन्दिर के न्यासी डॉ.संतोष कुमार पासवान के वैदिक एवं पौराणिक मंगलाचरण से इस ज्ञानसत्र का शुभारंभ किया। मंच का कुशल संचालन डॉ.बचनेश्वर झा व कथा पारायण पंडित हरेराम मिश्र ने किया। इस अवसर पर पूजा समिति के अध्यक्ष प्रो.मदन संरक्षक,सचिव पलटू सिंह, कोषाध्यक्ष उमेश सिंह,ललित मंडल,राम गुलाम सिंह,संजय कुमार सिंह,योगी सिंह,बिनोदानंद झा,उज्ज्वल कुमार,राधारमन झा आदि मौजूद थे।


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