देवरिया में शिक्षक कृष्णमोहन सिंह खुदकुशी मामले की जांच तेज हो गई है। इस प्रकरण में निलंबित पटल सहायक संजीव सिंह के कमरे में बंद अलमारी को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में खोला गया। अलमारी में रखी फाइलों का निरीक्षण और सूचीकरण कार्य शुरू कर दिया गया है। एएसडीएम सीमा पाण्डेय बीएसए कार्यालय पहुंचीं, जहां उनकी निगरानी में फाइलों की जांच की गई। जांच टीम द्वारा अलमारी में रखे दस्तावेजों को एक-एक कर देखा जा रहा है और उनका विवरण तैयार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इन फाइलों में संबंधित शिक्षक के विद्यालय सहित अन्य सहायता प्राप्त विद्यालयों की महत्वपूर्ण पत्रावलियां शामिल हैं। ये दस्तावेज जांच के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं। कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग निवासी कृष्णमोहन सिंह गौरीबाजार विकास खंड के एक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। वह गोरखपुर में रह रहे थे। 20 फरवरी की रात उन्होंने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले उन्होंने एक सुसाइड नोट और वीडियो जारी किया था। इसमें उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था। इस मामले में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को 27 फरवरी को निलंबित किया गया था, जबकि लिपिक संजीव सिंह पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी थी। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित पटल की जिम्मेदारी पहले प्रधान सहायक तनुज श्रीवास्तव के पास थी। लापरवाही पाए जाने पर उन्हें भी निलंबित किया गया। 11 मार्च को इस रिक्त पटल पर वरिष्ठ प्रधान लिपिक स्वदेश श्रीवास्तव की तैनाती की गई थी, लेकिन जरूरी फाइलें निलंबित लिपिक की अलमारी में ही बंद रह गई थीं। प्रभारी बीएसए अनिल कुमार सिंह ने बताया कि मजिस्ट्रेट की निगरानी में फाइलों को सूचीबद्ध किया जा रहा है, ताकि जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। इस प्रकरण में केस दर्ज होने के बाद से निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह फरार हैं। पुलिस ने दोनों की तलाश तेज कर दी है और उन पर इनाम भी घोषित किया गया है।

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