देवरिया में चैत्र नवरात्र के समापन पर दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर विवाद खड़ा हो गया। शहर के सिंधी मिल स्थित देवरी मंदिर परिसर में स्थापित प्रतिमाओं को नगर पालिका कर्मचारियों द्वारा कूड़ा ढोने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली में ले जाए जाने पर लोगों ने कड़ी नाराजगी जताई। नवरात्र के पहले दिन जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने विधि-विधान से पूजन कर इन प्रतिमाओं की स्थापना कराई थी। पूरे नौ दिनों तक मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लेजर शो और भगवती जागरण जैसे आयोजन शामिल थे। इन आयोजनों पर लाखों रुपये खर्च होने की बात भी सामने आई है। दशमी के दिन जब प्रतिमाओं के विसर्जन की प्रक्रिया शुरू हुई, तो नगर पालिका के कर्मचारियों ने मूर्तियों को कूड़ा ढोने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर जुलूस के रूप में ले जाना शुरू कर दिया। इस दृश्य को देखकर स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। उनका कहना था कि जिन प्रतिमाओं की स्थापना पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से की गई थी, उन्हें इस तरह कूड़े की गाड़ी में ले जाना आस्था के साथ खिलवाड़ है। स्थानीय नागरिक अमित पाण्डेय ने आरोप लगाया कि एक ओर जहां धार्मिक आयोजनों पर भारी खर्च किया गया, वहीं विसर्जन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में सम्मान का ध्यान नहीं रखा गया। लोगों ने इस मामले में दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मनोज मद्धेशिया ने कहा कि यह आस्था के साथ खिलवाड़ है और इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जानी चाहिए। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी संजय तिवारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने घटना की जानकारी होने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
फिलहाल, इस घटना को लेकर शहर में व्यापक चर्चा है। लोग प्रशासन से इस मामले में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करने की उम्मीद कर रहे हैं।

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