देवरिया जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय से लगभग 3 किलोमीटर दूर अगस्तपार गांव स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर मंगलवार सुबह 10:30 बजे तक बंद मिला। इसके कारण इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को बिना उपचार के ही वापस लौटना पड़ा। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब केंद्र पर ताला लटका मिला हो। ग्रामीणों का कहना है कि यहां डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी अक्सर समय पर नहीं पहुंचते हैं, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं ग्रामीणों ने बताया कि सरकार की मंशा गांव-गांव में आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित कर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है। हालांकि, जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत है। डॉक्टरों और कर्मचारियों की नियमित अनुपस्थिति के कारण इन केंद्रों का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। मंगलवार को भी कई मरीज सुबह से ही इलाज के लिए केंद्र पर पहुंचे थे। केंद्र बंद होने के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। कुछ मरीजों ने बताया कि उन्हें मजबूरन निजी क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई इस मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित केंद्र की जांच कराई जाएगी और यदि लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि स्वास्थ्य केंद्रों की नियमित निगरानी की जाए और कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को समय पर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ मिल सकें।

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