हरदोई में नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मनमोहन सिंह ने 10 साल कैद की सजा सुनाई है। 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा का आदेश जारी किया गया है। कोर्ट ने जुर्माने की आधी रकम बतौर क्षतिपूर्ति पीड़िता को देने का भी आदेश दिया है। मामला साढ़े दस साल पुराना है। शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला द्वारा 22 अक्टूबर 2015 को मुकदमा दर्ज कराया था। महिला ने बताया था कि 10 अक्टूबर 2015 को उनकी बेटी अपने चचेरे नाना प्यारे के साथ हर्रई गांव गई थी। आरोप था कि प्यारे ने उनकी पुत्री को शाहाबाद के मोहल्ला गढ़ीचांद खां निवासी रंजीत और गुलवीर को 20 हजार रुपये में बेच दिया था। महिला ने यह भी आरोप लगाया था कि दोनों व्यक्तियों ने उनकी पुत्री के साथ दुष्कर्म किया। घटना के 10 दिन बाद पुलिस ने किशोरी को शाहाबाद से सकुशल बरामद कर लिया था। विवेचना के उपरांत पुलिस ने केवल रंजीत के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। गुलवीर और प्यारे का नाम मामले से हटा दिया गया था। अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाह और 10 अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज मनमोहन सिंह ने सजा सुनाई है। नाबालिग पीड़िता ने पुलिस और मजिस्ट्रेट को दिए अपने बयान में बताया था कि पिता की मृत्यु के बाद उनकी मां ने दूसरी शादी कर ली थी। वह अपने नाना के घर गई थी, जहां रंजीत का आना-जाना था। पीड़िता ने यह भी बताया था कि रंजीत से उसके कई बार शारीरिक संबंध बने थे। पीड़िता और गवाहों के बयानों का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने टिप्पणी की कि गवाही से यह स्पष्ट है कि दोनों के बीच प्रेम प्रसंग था। इसी के चलते आपसी संबंध बने थे। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता की उम्र घटना के समय 11 साल तीन माह थी। कानून की नजर में 18 साल से कम उम्र की महिला की सहमति महत्वहीन होती है।

Leave a Reply