दिल्ली में इस बार छठ महापर्व पर पीएम मोदी 28 अक्टूबर की सुबह वासुदेव घाट पर पूजा-अर्चना में शामिल हो सकते हैं। वे उदीयमान सूर्य को अर्घ देंगे। इस मौके पर एलजी बीके सक्सेना, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, सीएम रेखा गुप्ता के अलावा केंद्रीय व मंत्रिमंडल के कई मंत्री भी रहेंगे। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, पीएम की सुरक्षा को ध्यान में घाट क्षेत्र में विशेष बैरिकेडिंग, निगरानी कैमरे व सुरक्षा कर्मियों की तैनाती हो रही है। इसके अलावा दिल्ली में घाटों में को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। यहां करीब 1300 घाटों पर छठ पूजा का आयोजन हो रहा है, जिनमें 17 प्रमुख घाट यमुना नदी के किनारे बनाए गए हैं। वहीं, मुंबई में घाटों में को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। मुंबई और ठाणे में 83 स्थानों पर सामूहिक छठ पूजा का आयोजन हो रहा है। राजधानी दिल्ली में करीब 1300 घाटों पर छठ पूजा का आयोजन हो रहा है, जिनमें 17 प्रमुख घाट यमुना नदी के किनारे बनाए गए हैं। छठ महापर्व को लेकर भारत ही नहीं विदेशों में भी उत्साह है। ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन समेत दुनियाभर के कई देशों में भी भारतीय व्रतियों ने सोमवार को सूर्य को अर्घ्य दिया। फिजी, सूरीनाम, मॉरिशस, त्रिनिनाद-टोबेगो में भी बड़ी संख्या में भारतीय आबादी रहती है, यहां भी छठ पूजा का आयोजन किया गया है। विदेशों से छठ पर्व की 6 तस्वीरें… छठ पर्व में किस दिन क्या होता है… पहला दिन- नहाय खाय। जिसमें घर की सफाई, फिर स्नान और शाकाहारी भोजन से व्रत की शुरुआत होती है। दूसरा दिन- व्रती दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करते हैं। इसे खरना कहा जाता है। तीसरा दिन- छठ का प्रसाद बनाता है। प्रसाद में ठेकुआ, चावल के लड्डू और चढ़ावे के रूप में फल आदि होता है। शाम को बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है और तालाब या नदी किनारे डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। चौथा दिन- कार्तिक शुक्ल सप्तमी को उगते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है। व्रतधारी दोबारा वहीं जाते हैं, जहां शाम को अर्घ्य दिया था। छठ पर्व क्यों है खास… छठ पर्व का इतिहास भी जान लीजिए… स्कंद पुराण के मुताबिक, राजा प्रियव्रत (मनु के पुत्र) को कोई संतान नहीं था। उन्होंने महर्षि कश्यप से वरदान मांगा। ऋषि के यज्ञ से उन्हें एक बेटा हुआ, लेकिन उसमें जान नहीं थी। इससे दुखी राजा-रानी आत्महत्या की सोचने लगे। तभी एक देवी प्रकट हुईं। उन्होंने कहा, ‘मैं उषा की ज्येष्ठा बहन षष्ठी देवी हूं, बच्चों की रक्षा मेरी जिम्मेदारी है। यदि तुम मेरी विधि से पूजा करोगे तो तुम्हें संतान सुख मिलेगा।’ राजा-रानी ने देवी की पूजा की और बेटे का जन्म हुआ। इसके बाद से इस पूजा की शुरुआत हो गई। ऋग्वेद में लिखा गया है कि सूर्य और उसकी किरणों की आराधना से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं। मोदी सरकार ने छठ को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने की पहल की है। परदेसी बिहारियों के लिए भास्कर का खास छठ गीत आज छठ है। दीदी वीडियो कॉल पर दिखा रही थी, घर में उत्सव का माहौल है। मां ठेकुआ पका रही हैं। बुआ दऊरा सजा रही हैं। गाने गूंज रहे हैं। सब घाट पर जाने की तैयारी में जुटे हैं। डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए। पिछली बार मैं ही दऊरा लेकर घाट गया था, पर इस बार घर नहीं जा सका। रोजी-रोटी के लिए सब कुछ छूटता जा रहा। मां-बाबूजी, गांव-घर, खेत-खलिहान। परदेस में जो कुछ कमा रहा, सब कर्ज चुकाने और EMI भरने में ही चला जा रहा। पूरी खबर पढ़ें…
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