दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर चल रही उस खबर को पूरी तरह झूठा बताया है जिसमें कहा गया था कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा निदेशक ने मीडिया से कहा कि इस तरह का कोई आदेश या सर्कुलर शिक्षा विभाग की ओर से कभी जारी नहीं हुआ है। इस फर्जी खबर की जांच के लिए सिविल लाइंस पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। निदेशालय के मुताबिक, 20 नवंबर 2025 को जारी किया गया सर्कुलर केवल सुप्रीम कोर्ट की रिट याचिका ‘आवारा कुत्तों से घिरा शहर, बच्चे कीमत चुका रहे हैं’ के निर्देशों का पालन करने के लिए था। इसका मकसद स्कूल परिसरों में सुरक्षा गार्डों की तैनाती और जरूरी इंतजामों के जरिए आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकना था। शिक्षकों को गिनती करने का कोई निर्देश नहीं दिया गया था। मामला क्या है सोशल मीडिया पर कुछ दिनों से ऐसे वीडियो और पोस्ट वायरल हो रहे थे जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों से आवारा कुत्तों की गिनती करवाई जा रही है। इन दावों को शिक्षा विभाग ने मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण बताया। विभाग ने यह भी कहा कि इस तरह की गलत जानकारी फैलने पर उन्होंने 30 दिसंबर 2025 को एक प्रेस नोट जारी कर स्थिति स्पष्ट की थी। इसके बावजूद फर्जी खबरें और वीडियो फैलाए जाते रहे। प्रेस कांफ्रेंस की मुख्य बातें… मानहानि का केस दर्ज पुलिस में दी गई शिकायत में भारतीय न्याय संहिता, 2023 और आईटी एक्ट, 2000 की धाराओं के तहत शिकायत दर्ज कराई गई है। इनमें आपराधिक मानहानि, जालसाजी, प्रतिरूपण और गलत इलेक्ट्रॉनिक सामग्री प्रसारित करने जैसे अपराध शामिल हैं। शिक्षा निदेशालय की अपील विभाग ने मीडिया संगठनों और नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी सामग्री को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता आधिकारिक सोर्स से जरूर जांचें। निदेशालय ने कहा है कि वह पारदर्शी शासन, छात्रों की सुरक्षा और झूठी खबरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।
https://ift.tt/xIT7P02
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply