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दवाओं की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण की मांग:मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन ने SDM को ज्ञापन दिया


                 दवाओं की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण की मांग:मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन ने SDM को ज्ञापन दिया

दवाओं की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण की मांग:मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन ने SDM को ज्ञापन दिया

कासगंज में बुधवार को फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FMSRAI) के सदस्यों ने उपजिलाधिकारी (SDM) संजीव कुमार को प्रदेश सरकार के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में दवाओं की लगातार बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण लगाने की मांग की गई है, ताकि देश की बीमार जनता को राहत मिल सके। संगठन के अध्यक्ष ने ज्ञापन में बताया कि दवाओं पर जीएसटी कम करने से आम जनता को कुछ राहत मिली थी, लेकिन यह कदम सभी लोगों को कीमतों में वृद्धि के प्रभाव से पूरी तरह नहीं बचा सका। दवाओं की कीमतें नियमित रूप से बढ़ रही हैं, जिससे लोगों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि दवाओं की कीमतें निर्धारित करने के लिए अपनाई जा रही नीति ही मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण है। पहले ड्रग प्राइस कंट्रोल डिवीजन (DPCD) लागत-आधारित मॉडल पर अधिकतम कीमतों की गणना करता था, जिसमें दवाओं के निर्माण की इनपुट लागत को आधार बनाया जाता था। हालांकि, वर्ष 2014 के बाद, डीपीसीओ 2013 के माध्यम से, विभाग ने लागत-आधारित मॉडल से बाजार-आधारित मॉडल में बदलाव किया। इस बाजार-आधारित दृष्टिकोण ने अनुसूचित दवा श्रेणी में भी कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि की है। कोविड काल के बाद सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (API) की कीमतों में काफी कमी आई थी, लेकिन इसका लाभ देश के लोगों को नहीं मिल सका। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अनुसूचित दवाओं की अधिकतम कीमतें एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) से जुड़े बदलावों के आधार पर तय होती हैं, जो लगातार बढ़ रहा है। संगठन ने आरोप लगाया कि मुनाफाखोर कंपनियों ने कच्चे माल की कीमतों में कमी के बावजूद अपनी एमआरपी कम नहीं की। संगठन का मानना है कि मूल्य निर्धारण मॉडल को इनपुट लागत को ध्यान में रखना चाहिए, न कि बाजार को पूरी स्वतंत्रता देनी चाहिए, जिससे भारत के नागरिकों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।


Sourse: Dainik Bhaskar via DNI News

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