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दरभंगा में रजिस्ट्रेशन, एग्जाम फॉर्म भरने के नाम पर वसूली:335 स्टूडेंट्स को नहीं मिला एडमिट कार्ड; डीएम ने 2 प्रिंसिपल को किया सस्पेंड, FIR का आदेश

दरभंगा के मनीगाछी प्रखंड अंतर्गत राघोपुर ड्योढ़ी स्थित प्लस टू उच्च मिडिल स्कूल में स्कूल प्रशासन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। मैट्रिक और इंटर के कुल करीब 335 छात्र-छात्राओं से रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फॉर्म भरने के नाम पर शुल्क तो लिया गया, लेकिन न तो राशि बोर्ड कार्यालय में जमा की गई और न ही बिहार बोर्ड के पोर्टल पर फॉर्म अपलोड किया गया। नतीजतन इन विद्यार्थियों के एडमिट कार्ड जारी नहीं हो सके, जिससे उनका भविष्य संकट में पड़ गया। बताया गया कि स्कूल से 150 छात्र मैट्रिक और 185 छात्र इंटर परीक्षा में शामिल होने वाले थे। अन्य विद्यालयों के एडमिट कार्ड जारी हो चुके हैं, जबकि इस स्कूल के सैकड़ों परीक्षार्थियों को अब तक प्रवेश पत्र नहीं मिल पाया। 10 जनवरी से परीक्षा और उसी दिन से प्रायोगिक परीक्षा प्रस्तावित होने के कारण छात्र-छात्राओं व अभिभावकों में भारी चिंता और आक्रोश है। नाराज विद्यार्थियों ने स्कूल पहुंचकर हंगामा भी किया। जिलाधिकारी से मिलकर पंचायत प्रतिनिधियों ने रखी समस्याएं मामले की जानकारी मिलने पर पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कौशल कुमार से मुलाकात कर पूरी समस्या रखी। जांच में आरोप सही पाए गए। इसके बाद डीएम ने सख्त कार्रवाई करते हुए प्रभारी प्रिंसिपल अभिषेक कुमार और प्रिंसिपल रेखा कुमारी को निलंबित कर दिया। साथ ही दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। डीएम कौशल कुमार ने बताया कि बिहार बोर्ड से बातचीत हो चुकी है। बोर्ड ने आश्वासन दिया है कि जिन विद्यार्थियों का एडमिट कार्ड जारी नहीं हो सका है, उनके लिए मार्च, अप्रैल महीने में स्पेशल परीक्षा आयोजित की जाएगी और उसका रिजल्ट समय पर मई मे घोषित किया जाएगा, ताकि बच्चों का साल बर्बाद न हो। रजिस्ट्रेशन शुल्क लेकर एडमिट कार्ड नहीं दिया पंचायत के मुखिया मानिक कुमार मंडल ने बताया कि रजिस्ट्रेशन शुल्क तो लिया गया, लेकिन बोर्ड में जमा हुआ या नहीं—इसकी जानकारी नहीं दी गई। अब एडमिट कार्ड न मिलने से बच्चों का भविष्य अंधेरा में चला गया। एक सप्ताह से प्रभारी शिक्षक विद्यालय से फरार बताए जा रहे हैं। ग्रामीण एस.एन. झा और अन्य अभिभावकों ने आरोप लगाया कि करीब 335 बच्चों से तीन महीने पहले परीक्षा फॉर्म और शुल्क लिया गया था, जिसकी रसीद भी दी गई, लेकिन फॉर्म भरे ही नहीं गए। जब प्रभारी प्रधानाध्यापक से पूछताछ की गई तो उन्होंने गलती स्वीकार करते हुए कहा कि पोर्टल बंद हो चुका है। विद्यालय के वर्तमान प्रधानाध्यापक शिव नारायण मल्लिक ने भी पुष्टि की कि बच्चों का फॉर्म नहीं भरा गया, जिसके कारण एडमिट कार्ड नहीं आया और शिक्षक बेवजह आक्रोश झेल रहे हैं। डीएम ने स्पष्ट किया कि छह महीने पहले ही चार्ज हैंडओवर का आदेश दिया गया था, लेकिन समय पर चार्ज नहीं लिया गया। इस लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशासनिक कार्रवाई की जा रही है। डीएम ने छात्र-छात्राओं और अभिभावकों से अपील की है कि घबराने की जरूरत नहीं है—स्पेशल परीक्षा में सभी को बैठने का अवसर मिलेगा और उनका एक साल बर्बाद नहीं होगा।


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